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देश को फिर से अहिंसा का पाठ पढ़ाने की जरूरतः राष्ट्रपति

कल देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शपथ लेंगे।

देश को फिर से अहिंसा का पाठ पढ़ाने की जरूरतः राष्ट्रपति
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देश के मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल का आज आखिरी दिन है। आज उन्होंने देश के अगले राष्ट्रपति को शुभकामनाएं दी तथा देश की उज्जवल भविष्य की कामना की। कल उनकी विदाई के साथ ही नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शपथ लेंगे।

देश के नाम अपने आखिरी संदेश में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारत की आत्मा, बहुलवाद और सहिष्णुता में बसती है और भारत केवल एक भौगोलिक सत्ता नहीं है बल्कि इसमें विचारों, दर्शन, बौद्धिकता, औद्योगिक प्रतिभा, शिल्प तथा अनुभव का इतिहास शामिल है।

उन्होंने कहा हम एक-दूसरे से तर्क-वितर्क कर सकते हैं, सहमत-असहमत हो सकते हैं, लेकिन विभिन्न विचारों की मौजूदगी को हम नकार नहीं सकते हैं। उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता भारत की पहचान है।

देश की आपसी हिंसा पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि हमें हमें इसकी निंदी करनी चाहिए। हमें अहिंसा की शक्ति को जगाना होगा। महात्मा गांधी भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में देखते थे जहां समावेशी माहौल हो। हमें ऐसा ही राष्ट्र बनाना होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि मैं भारत के लोगों का सदैव ऋणी रहूंगा। जब मैं 5 साल पहले राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी तो संविधान की रक्षा का भी शपथ लिया था।

मैं पिछले 5 सालों में मैंने देश के संविधान की रक्षा के लिए हरसंभव कोशिश की। मैं अपने कार्यकाल के दौरान कई जगहों की यात्रा की। बुद्धिजीवियों, छात्रों से मिला और उनसे काफी कुछ सीखा।

मैंने बतौर राष्ट्रपति खूब प्रयास किए। मैं अपने प्रयासों में कितना सफल हो पाया यह तो अब इतिहास में ही परखा जाएगा। संविधान मेरा पवित्र ग्रंथ रहा है। भारत की जनता की सेवा मेरी अभिलाषा रही है।'

गौरतलब है कि मुखर्जी का बतौर राष्ट्रपति सोमवार को आखिरी दिन था। मंगलवार को कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह दोपहर सवा 12 बजे होना है।

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