Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2018 विशेष: जब शास्त्री जी के कहने पर घरों में नहीं जले चूल्हे

लाल बहादुर शास्त्री की 114वीं जयंती पर जानिए शास्त्रीजी भारत की राजनीति में अकेले ऐसे शख्स हुए हैं, जिनका जितना सम्मान आम लोगों में है, उतना ही सम्मान राजनीतिक लोगों और पार्टियों में भी है। आखिर इसकी क्या वजह है? इसकी सबसे बड़ी वजह है व्यक्तिगत जीवन में उनके द्वारा अपनाई गई कठोर नैतिकता।

लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2018 विशेष: जब शास्त्री जी के कहने पर घरों में नहीं जले चूल्हे

कम ही राजनेता ऐसे होते हैं, जिन्हें हर वर्ग का स्नेह और सम्मान मिलता है। जो वास्तविक अर्थों में जननेता कहा जाता है। देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ऐसे ही जननायक थे। अपने सादगीपूर्ण जीवन और नैतिकता के चलते ही वे देश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में शुमार हुए। उनकी 114वीं जयंती पर उन्हें याद कर रहे हैं लेखक।

इसमें कोई संदेह नहीं कि भारतीय राजनीति के इतिहास में महात्मा गांधी से बड़ी कोई शख्सियत नहीं है। महात्मा गांधी अकेले ऐसे भारतीय राजनेता थे, जिनका देश के हर कोने में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में सम्मान मिला। इसी तरह अगर राजनयिक प्रभाव के नजरिए से देखें तो दुनिया में भारत की श्रेष्ठता का प्रतिनिधित्व पंडित जवाहरलाल नेहरू करते हैं।

इसी तरह अगर बात देश के सर्वाधिक सम्मानित नेताओं की होती है तो देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का नाम भी बहुत आदर से लिया जाता है। आमतौर पर राजनीति में हर नेता का कोई न कोई वैचारिक विरोधी मिल जाता है। लेकिन हिंदुस्तान की सियासत में किसी भी राजनीतिक पार्टी के किसी भी नेता के द्वारा शायद ही किसी ने कभी लाल बहादुर शास्त्री की आलोचना की गई हो।

नैतिकता की मिसाल

शास्त्रीजी भारत की राजनीति में अकेले ऐसे शख्स हुए हैं, जिनका जितना सम्मान आम लोगों में है, उतना ही सम्मान राजनीतिक लोगों और पार्टियों में भी है। आखिर इसकी क्या वजह है? इसकी सबसे बड़ी वजह है व्यक्तिगत जीवन में उनके द्वारा अपनाई गई कठोर नैतिकता। यूं तो भाषण देने में शायद ही कोई राजनेता ऐसा हो,

जो नैतिकता की बड़ी-बड़ी डींगे न हांकता हो, लेकिन अपने व्यक्तिगत जीवन में व्यावहारिक रूप से नैतिकता का जिस तरह से ताउम्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने पालन किया, वैसा किसी दूसरे राजनेता में प्राय: नहीं दिखता। सच तो यह है कि दूसरा कोई इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता।

शायद यह उनकी व्यक्तिगत नैतिकता का ही कमाल था कि जब उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए देश के लोगों से सप्ताह में एक दिन उपवास का आग्रह किया तो सचमुच हफ्ते में एक दिन लोगों के घर में चूल्हा नहीं जलता था। लेकिन उपवास की यह घोषणा लाल बहादुर शास्त्री जी ने अचानक यूं ही नहीं कर दी थी। इसका पहले उन्होंने अपने घर और परिवार के बीच बाकायदा रिहर्सल किया था।

उनके पुत्र अनिल शास्त्री ने कुछ साल पहले मीडिया के साथ इस संबंध में एक संस्मरण को साझा किया था, जिसके मुताबिक, ‘एक दिन पिताजी ने (शास्त्रीजी) घर में घोषणा की कि आज खाना नहीं बनेगा, सब लोग उपवास रहेंगे। इस पर मेरी मां (सुश्री ललिता शास्त्री) ने पूछा ऐसा क्यों? तो पिताजी ने जवाब दिया कि मैं देखना चाहता हूं कि मेरे बच्चे एक दिन भूखे रह सकते हैं या नहीं।

उस दिन घर में खाना नहीं बना और जब किसी ने कोई शिकायत नहीं की तो अगले दिन पिताजी ने देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का आह्वान कर दिया ताकि सूखे की विकट समस्या से पैदा हुए खाद्यान्न संकट से निपटा जा सके।’ दुनिया के इतिहास में इससे पहले कभी किसी देश के किसी राजनेता ने ऐसी घोषण नहीं की और न ही किसी देश ने ऐसी किसी घोषणा पर अमल किया।

यह अकेले लाल बहादुर शास्त्री का कद था और आत्मविश्वास कि देशवासी उनकी बात सुनेंगे और उसे मानेंगे भी। कहना चाहिए उनका विश्वास बिल्कुल दुरुस्त था, आज भी लोग बताते हैं कि लोगों के घरों में सचमुच एक दिन चूल्हा नहीं जलता था। उन दिनों इस तरह का व्रत रखना उनके प्रति सम्मान का बहुत बड़ा प्रमाण है।

Next Story
Top