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लालबहादुर शास्त्री पुण्यतिथि: क्या अपनी मौत से पहले सुभाषचंद्र बोस से मिले थे ''शास्त्री'' जी

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) की आज पुण्य तिथि है। लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) का जीवन जितना बेदाग और सरल रहा है उनकी मौत उतनी ही विवादित (Lal Bahadur Shastri Death) है। कई लोगों का कहना है कि उनकी हत्या की गई थी तो कई लोगों का कहना है कि उनकी मौत में पाकिस्तान का हाथ था। कई लोग यह भी दावा करते आए हैं कि देश के ही लोगों ने उनकी हत्या कर दी थी। लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद उनके परिवार से राजनीति में कोई नहीं आया। आज लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) के पुण्यतिथि के मौके पर हम आपको बता रहे हैं उस रात के बारे में जब शास्त्री जी ने अपनी आखिरी सांस ली थी।

लालबहादुर शास्त्री पुण्यतिथि: क्या अपनी मौत से पहले सुभाषचंद्र बोस से मिले थे
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Lal Bahadur Shastri Death Anniversary

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) की आज पुण्य तिथि है। लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) का जीवन जितना बेदाग और सरल रहा है उनकी मौत उतनी ही विवादित (Lal Bahadur Shastri Death) है। कई लोगों का कहना है कि उनकी हत्या की गई थी तो कई लोगों का कहना है कि उनकी मौत में पाकिस्तान का हाथ था। कई लोग यह भी दावा करते आए हैं कि देश के ही लोगों ने उनकी हत्या कर दी थी। लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद उनके परिवार से राजनीति में कोई नहीं आया। आज लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) के पुण्यतिथि के मौके पर हम आपको बता रहे हैं उस रात के बारे में जब शास्त्री जी ने अपनी आखिरी सांस ली थी।


ताशकंद समझौता

1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला बोला तो लाल बहादुर शास्त्री ने कच्छ की ओर से पाकिस्तान में सेना भेजकर एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमा लिया। जिसके बाद पाकिस्तान की हालत खराब हो गई। लेकिन 1966 में हुए ताशकंद समझौते में पाकिस्तान को हाजी पीर और ठिथवाल के जीते इलाके को वापस कर दिया।

जिसके कारण शास्त्री जी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कुलदीप नैयर के मुताबिक शास्त्री जी ने देर रात को अपने घर फोन मिलाया था। उनकी बड़ी बेटी ने फोन उठाया तो शास्त्री जी ने कहा कि 'अम्मा को फोन दो'। अम्मा यानी शास्त्री जी की पत्नी ललिता। उनकी बेटी ने कहा कि अम्मा फोन पर नहीं आएंगी।

शास्त्री जी ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि हाजी पीर और ठिथवाल का इलाका आपने पाकिस्तान को लौटा दिया है। जिसकी वजह से अम्म बेहद नाराज हैं। शास्त्री जी को इस बात से बेहद धक्का लगा था। इसके बाद उन्होंने भारत में अपने सचिव वेंटररमन को भारतीय नेताओं की प्रतिक्रिया जानने के लिए फोन किया।

वेंटररमन ने बताया कि अभी तक केवल दो ही नेताओं की प्रतिक्रिया आई है। एक अटल बिहारी वाजपेयी की और दूसरी कृष्ण मेनन की। दोनों नेताओं ने इस कदम की आलोचना की है। इसके बाद वह कमरे में चक्कर लगाने लगे। बाद में वह जाकर सो गए।

मृत शास्त्री को देखने पहुंचे पाक जनरल

कुलदीप नैयर बताते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हो चुका था। इसकी खुशी के कारण होटल में पार्टी चल रही थी। क्योंकि वह शराब नहीं पीते थे इसी लिए वो अपने कमरे में जाकर सो गए। वहां उन्होंने सपने में देखा कि शास्त्री जी का देहांत हो गया है।

दरवाजे पर एक रूसी महिला ने दस्तक दी। तब उनकी आंख खुली। उस महिला ने बताया कि 'योर प्राइम मिनिस्टर इज डाइंग'। कुलदीप नैयर बताते हैं कि वह तेजी से भागकर शास्त्री जी के कमरे में पहुंचे। जहां पहले से रूस के प्रधानमंत्री कोसिगिन खड़े थे।

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उन्होंने कुलदीप नैयर से कहा कि शास्त्री जी नहीं रहे। वहां पर जाकर देखा तो एक बड़े से पलंग पर शास्त्री जी का पार्थिव शरीर था। वहां पाकिस्तान के जनरल अयूब भी पहुंचे। अयूब ने कहा कि यहां एक ऐसा आदमी लेटा है जो भारत और पाकिस्तान को एक कर सकता था।

लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल ने बताया कि मां कहती रहती थीं कि अगर वह इस दौरे पर उनके साथ गई होतीं तो शास्त्री जी की मौत न होती। ताशकंद दौरा एकमात्र दौरा था जब शास्त्री जी की पत्नी उनके साथ नहीं गई थीं।
क्योंकि यह कोई आम दौरा नहीं बल्कि एक कूटनीतिक दौरा था इसलिए विदेश मंत्रालय ने उन्हें जाने से मना कर दिया। शास्त्री जी को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ था

लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद पूरा देश में शोक की लहर थी। इतना ही नहीं विदेश में भी शोक की लहर थी। क्योंकि शास्त्री जी की आकस्मिक मौत दूसरे देश में हुई थी। वो भी एक ऐसे मौके पर जब एक महत्वपूर्ण दस्तावेज पर हस्ताक्षण किए गए थे। उनका शरीर जब भारत लाया गया तो पोस्टमॉर्टम नहीं किया गया। जिससे उनके मौत का असली कारण आज तक पता नहीं चल पाया है।

सुभाष चंद्र बोस से मिले थे शास्त्री!

अल्ट बालाजी प्रोडक्शन की बनी हुई वेब सीरीज 'बोस' में दिखाया गया है कि शास्त्री जी सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) से मिले थे। जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। अब ऐसा हुआ है या नहीं इसके बारे में हम सही चीज नहीं बता सकते। क्यों आधिकारिक रूप से 18 अगस्त 1945 को नेताजी एक हावाई दुर्घटना में मारे गए थे। जिसके बाद उन्हें किसी ने नहीं देखा था। फिलहाल नेता जी की मौत भी एक रहस्य ही बनी हुई थी।

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