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लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2018 विशेष: ‘जय जवान जय किसान’ नारे की कहानी

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ऐसे ही जननायक थे, जिन्हें हर वर्ग का स्नेह और सम्मान मिला। अपने सादगीपूर्ण जीवन और नैतिकता के चलते ही वे देश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में शुमार हुए। उनकी 114वीं जयंती पर जानिए उनके जीवन से जुड़ी कुछ ख़ास बातें।

लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2018 विशेष: ‘जय जवान जय किसान’ नारे की कहानी

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ऐसे ही जननायक थे, जिन्हें हर वर्ग का स्नेह और सम्मान मिला। अपने सादगीपूर्ण जीवन और नैतिकता के चलते ही वे देश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में शुमार हुए। उनकी 114वीं जयंती पर जानिए उनके जीवन से जुड़ी कुछ ख़ास बातें...

‘जय जवान जय किसान’

यूं तो प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अपनी कई खूबियों के लिए चर्चा में रहे, लेकिन जिस तरह से उन्होंने ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया और उसे जन-जन का समर्थन मिला, उससे सचमुच में उनका भारतीय जनमानस पर प्रभाव दूसरे कई राजनेताओं के मुकाबले बहुत ज्यादा है।

जय जवान का नारा उन्होंने देशवासियों से सीमा से लड़ रहे जवानों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए दिया था ताकि हमारे सैनिकों को देश के आम लोगों का नैतिक बल और समर्थन हासिल हो।

जबकि जय किसान नारे के पीछे मकसद किसानों को अधिक से अधिक अन्न उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करना था, ताकि उन दिनों जो भारत में खाद्यान्न संकट था और जिसके चलते हम पर अमेरिका अपनी अप्रत्यक्ष गुलामी थोपने की कोशिश कर रहा था, उससे मुक्ति मिल सके।

जब शास्त्री जी ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब भारत में विकट खाद्यान्न संकट था। हम अमेरिका की पीएल-480 स्कीम के तहत हासिल लाल गेहूं खाने के लिए बाध्य थे।

1965 में एक तरफ पाकिस्तान के साथ जंग और दूसरी तरफ भयानक सूखे ने इस संकट को और भी बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था। तभी लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश के लोगों से दो महत्वपूर्ण आह्वान किए थे।

एक तो हर खाली जमीन पर अनाज और सब्जियां बोई जाएं और दूसरा यह कि हर कोई सप्ताह में एक दिन उपवास रखे। उनका यह आह्वान किसी विशेष जाति वर्ग या उम्र समूह के लिए नहीं था बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए था, जिसको ऐसा करने से शारीरिक नुकसान न हो।

कहते हैं हर किसी की जिंदगी में एक दो मौके या काम ऐसे होते हैं, जो उन्हें हमेशा-हमेशा के लिए अजर-अमर कर देते हैं। किसानों और जवानों के प्रति प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जो आदर प्रकट किया था।

उससे न केवल वह देश के सबसे सम्मानित राजनेता बन गए बल्कि उनकी इसी नैतिकता के चलते भारत के लोगों ने जल्द ही खाद्यान्न संकट पर विजय पा ली।

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