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न्यायिक सुधार के उपाय नहीं हुए कारगर, जजों की कमी के कारण बढ़ी लंबित मामलों की संख्या

सुप्रीम कोर्ट में लंबित 63843 मामलों समेत उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में यह संख्या करीब 3.14 करोड़ पहुंच गई है।

न्यायिक सुधार के उपाय नहीं हुए कारगर, जजों की कमी के कारण बढ़ी लंबित मामलों की संख्या
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि रिक्त पदों पर जजों की नियुक्तियां न होने के कारण अदालतों में लंबित मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। मसलन उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों और जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में अभी भी 4655 न्यायधीशों के पद रिक्त पड़े हुए हैं, जिसके कारण लंबित मामलों की सुनवाई में देरी हो रही है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित 63843 मामलों समेत उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में लंबित मामलों की संख्या करीब 3.14 करोड़ पहुंच गई है।
केंद्र की राजग सरकार ने जहां जजों की नियुक्यिों के लिए राष्ट्रीय न्यायायिक नियुक्ति आयोग गठन करने की कवायद शुरू की है, वहीं पिछले सप्ताह ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी लंबित मामलों का अंबार लगने का कारण रिक्त पड़े जजों की नियुक्तियां न होना बताया और लंबित मामलों के लिए सीधे केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। विधि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो देश में लंबित मामलों की संख्या बढ़ने के लोगों की जागरूकता और अधिकारों के लिए अदालत की शरण लेना भी एक बड़ा कारण है।
पूर्ववर्ती यूपीए सरकार लंबित मामलों की संख्या घटाने और अन्य प्रक्रिया में सुधार लाने के अनेक उपाय लागू करने का भी दावा करती रही, लेकिन कारगर साबित नहीं हुई। ऐसे में अब केंद्र की नई सरकार के लिए न्यायिक सुधार के लिए की जा रही पहल किसी चुनौती से कम नहीं होगी? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को भी विधि विशेषज्ञ लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ने की वजह मानते हैं।
नीचे की स्‍लाइड्स में पढ़िए, क्या कहते हैं आंकड़े -
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