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भगवान विष्णु, शिव जी और इंद्र देव करते हैं प्रयागराज की रक्षा

कुंभ को लेकर मान्यता है कि सात हजार धनुष निरंतर मां गंगा की रक्षा करते हैं। इंद्र पूरे प्रयाग की रक्षा करते हैं। भगवान विष्णु भीतर के मंडल की रक्षा करते है।

भगवान विष्णु, शिव जी और इंद्र देव करते हैं प्रयागराज की रक्षा

कुंभ को लेकर मान्यता है कि सात हजार धनुष निरंतर मां गंगा की रक्षा करते हैं। इंद्र पूरे प्रयाग की रक्षा करते हैं। भगवान विष्णु भीतर के मंडल की रक्षा करते है। अक्षयवट की रक्षा स्वयं भगवान शिव करते हैं। कुंभ मेला की कहानी उस समय की है जब देवता पृथ्वी पर निवास करते थे।

वे ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण कमजोर हो गए और राक्षस पृथ्वी पर आतंक मचा रहे थे। समुद्र मंथन हुआ और इससे निकले अमृत कलश को छीनने के लिए असुर, देवताओं पर टूट पड़े। भगवान इंद्र के पुत्र जयंत इस अमृत कलश को लेकर निकल गए और यह भाग-दौड़ 12 दिन (मनुष्य के 12 वर्ष) तक चलती रही।

इन 12 दिव्य दिनों में चार स्थानों पर चार बार राक्षसों ने जयंत को पकड़ा और अमृत कलश छीनने का भरसक प्रयास किया। उसी समय सूर्य चन्द्र और बृहस्पति ने उन चारों स्थानों पर जयंत का साथ देकर अमृत कलश की रक्षा की।

खींचातानी में अमृत की कुछ बूंदें प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन क्षेत्र में गिरीं। कुंभ में संगम में डुबकी तो संन्यासी लगाते हैं मगर इसे शाही स्नान कहा जाता है।

पहले कुंभ में राजा-महाराजा आया करते थे और पहली डुबकी वही लगाते थे। उनके पीछे पीछे संन्यासी चलते थे। अब शाही स्नान की परंपरा संन्यासी निभाते हैं।

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