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संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल हो SC/ST कानून: शैलजा

लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी एससी/एसटी संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी।

संविधान की नौंवी अनुसूची में शामिल हो SC/ST कानून: शैलजा

लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी एससी/एसटी संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। अब इस विधेयक पर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश निष्प्रभावी हो जाएगा, जिसके विरोध में दलित संगठनों में आक्रोश बना हुआ है। वहीं ऐसे कानून को कोर्ट में चुनौती की नौबत से बचने के लिए कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने सरकार से मांग की है कि इस कानून को संविधान की नौंवी सूची में शामिल किया जाए।

राज्यसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत द्वारा गुरुवार को पेश किये गये एसटी/एससी संशोधन विधेयक पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने दलितों पर अत्याचार बढ़ता जा रहा है, इसके लिए उन्होंने एनसीआरबी के आंकड़ो का भी जिक्र किया और कहा कि आज गांधी जी की बात की जाती है, लेकिन समाज में इस कानून में इंदिरा व राजीव सरकार द्वारा सख्त प्रावधान लागू करने के बावजूद दलित अत्याचारों में कमी नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि एससी/एसटी कानून को संविधान की नौंवी अनुसूचि में शामिल करने की मांग लगातार हो रही है, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई ध्यान नहीं दे रही। सैलजा ने तर्क दिया कि नौंवी अनुसूचि में शामिल होने के बाद इस काननू को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी, लेकिन राजग सरकार बिना दबाव के ऐसा कतई नहीं करेगी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के जिस जज ने दलितों के खिलाफ यह फैसला दिया था उसके सेवानिवृत्त होते ही सरकार ने उसे एनजीटी का प्रमुख बना दिया।
शैलजा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को बदलने के लिए सरकार ने बिल में यह संशोधन लगातार बढ़ते दबाव के बीच किया है और इसी प्रकार नौंवी अनुसूचि के लिए दबाव बनाया जाएगा।

दबाव के दावे का सरकार ने नकारा

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने उच्च सदन में इस विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कुमारी सैलजा और अन्य विपक्षी सदस्यों के इस दावे को नकार दिया कि सरकार विभिन्न दबावों में यह विधेयक लाई है। उन्होंने कहा कि यह सरकार शुरू से ही इन वर्गों के लोगों के हकों के संरक्षण के लिए प्रयासरत रही है।
उन्होंने कहा कि इस सरकार की शुरू से ही इन वर्गों के प्रति प्रतिबद्धता थी। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के बाद विधेयक लाए जाने की पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया और कहा कि जिस मंशा से मूल कानून बनाया गया था, उसे बहाल करने के लिए यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले ही संबोधन में स्पष्ट कर दिया था कि उनकी सरकार गरीबों, पिछड़े लोगों की सरकार होगी।
उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में हमने वैसा करके भी दिखाया है और इस संबंध में किसी को कोई आशंका नहीं करनी चाहिए। गहलोत ने कहा कि वह अच्छी नीयत, अच्छी नीति और अच्छी कार्य योजना के साथ कठोर प्रयास कर इन वर्गों के हकों के संरक्षण के लिए प्रयासरत है। इसमें उन्हें सफलता भी मिली है।
चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने विशेष अदालतों के गठन की मांग की थी। इस पर उन्होंने कहा कि विधेयक में विशेष अदालतों की स्थापना का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि 14 राज्यों ने 195 विशेष अदालतें गठित की हैं। लोकसभा के बाद इस विधेयक को राज्यसभा ने भी ध्वनिमत से पारित कर दिया है।
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