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इस भारतीय की मदद के लिए आगे आए हजारों पाकिस्तानी

भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय कृष्ण कुमार की उम्र महज 20 साल थी।

इस भारतीय की मदद के लिए आगे आए हजारों पाकिस्तानी
नई दिल्ली. बरसों बाद अपनी जमीन, अपने लोग और अपनी जन्मभूमि पर लौटने का ऐहसास क्या होता है, ये कोई इस शख्स से पूछे। दरअसल 91 साल के कृष्ण कुमार खन्ना पाकिस्तान स्थित अपने निवास पर पहुंचे, जहां उन्हें लोगों का खूब प्यार मिला। उनकी इच्छा थी कि जीवन में एक बार वह अपने गांव शेखपुरा (पाकिस्तान) जाना चाहते थे। बंटवारे के समय कृष्ण कुमार के परिवार ने भारत में ही रहना बेहतर समझा था।
उन्होंने बताया, 'शेखपुरा में लोगों ने जिस तरह मेरा स्वागत किया वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है। वे लोग मुझे मेरे पुराने घर और दुकान का असली मालिक कह रहे थे।' अपने भाई और भतीजे के साथ पाकिस्तान यात्रा पर गए खन्ना को वहां बिल्कुल भी कड़वाहट का अनुभव नहीं हुआ। पाकिस्तान के लोगों ने खन्ना से बताया, 'यह जो कुछ भी हो रहा है, सब राजनीति है। हम भी अपने पूर्वजों की याद में भारत जाना चाहते हैं, लेकिन हमें आसानी से वीजा नहीं मिल पाता है।'
उन्होंने बताया कि जब वह बताते थे कि भारत से आए हैं तो लोग खुश हो जाते थे। खन्ना ने कहा, 'लोगों ने हमारे रहने खाने के साथ घूमने का भी इंतजाम किया। उन्होंने हमारी हर सुविधा का खयाल रखा।' खन्ना जब 20 साल के थे तभी उन्हें शेखपुरा छोड़कर भारत आना पड़ा था। वह शेखपुरा के अलावा लाहौर और ननकाना साहिब भी गए।
उन्होंने बताया, 'जब हम शेखपुरा की मंडी की तरफ जा रहे थे तो हमारा दिल जोर से धड़कने लगा। यहां हमारी दुकान हुआ करती थी। अब इस दुकान के मालिक फारुख अहमद हैं। जब हम वहां पहुंचे तो फारुख ने लोगों के बताया कि हम इस दुकान के असली मालिक हैं। वह हमें अंदर ले गए और बहुत देर तक बातचीत करते रहे।'
ये बात बहुत ही सही है, हम लोग ज्यादातर केवल मीडिया या राजनीति के कारण ज्यादा बैर व नफरत के शिकार हो जाते हैं, जबकि आम व्यक्ति व पाकिस्तान के विस्थापित लोग जब भी पाकिस्तान में गूरूद्वारे या अपने पैत्रीक घर या गांव जाते हैं तो उनको पाकिस्तान के स्थानिए लोगों के द्वारा बहुत ही अच्छा आदर सत्कार मिलता है।
उन्होंने अपना पैतृक घर भी देखा जहां उनका स्वागत किया गया। खन्ना ने बताया कि उन्होंने उसकी आंखों में आसू देखे जिसे भारत छोड़कर वहां जाना पड़ा था और उनका घर अलॉट किया गया था।
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