Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

जानें अपना अधिकार: बिन पैसे के कैसे लड़ सकते हैं अपना केस, फ्री में मिलता है वकील

भारतीय संविधान में लोगों को समानता के अधिकार के साथ ही न्याय का भी अधिकार भी दिया गया है।

जानें अपना अधिकार: बिन पैसे के कैसे लड़ सकते हैं अपना केस, फ्री में मिलता है वकील

भारतीय संविधान में लोगों को समानता के अधिकार के साथ ही न्याय का भी अधिकार भी दिया गया है। जिसमें न्यायपालिका यह तय करती है कि गरीबों और मजलूमों को नि:शुल्क कानूनी सहायता मुहैया कराई जा सके।

न्याय का यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 ए के तहत दिया गया है। यह 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम पारित हुआ था, जिसके तहत हर राज्य का यह उत्तर दायित्व है कि सभी को समान न्याय मिल सके।

यह भी पढ़ें- 20 साल की सजा सुनने के बाद अपराधी ने कोर्ट में ये कहते हुए पिया जहर

इसके तहत एक तंत्र की स्थापना को गठित करने को कहा गया। जिसके जरिए कार्यक्रम लागू करना, उसकी निगरानी व मूल्यांकन करना है।

इस कानून के पास होने के बाद इसमें कई तरह की स्कीम्स शुरू की गईं हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा फेमस स्कीम है लोक अदालत।

इन सुविधाओं को किया गया है शामिल

  • जनता के लिए किसी भी कानूनी कार्यवाही में अदालत के शुल्क से लेकर सभी तरह के प्रभार को अदा करना।

  • केस में कार्यवाही के लिए वकील उपलब्ध कराना।

  • कार्यवाही में आदेशों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करना

  • कार्यवाही में अपील और डॉक्यूमेंट के अनुवाद और छपाई के साथ ही पेपर बुक को तैयार करना।

यह भी पढ़ें- प्रद्युम्न मर्डर केस: सीबीआई इस छात्रा से करेगी पूछताछ, खुल सकते हैं कई राज

इन्हें मिलेगी मुफ्त कानूनी सहायता

  • असहाय बच्चे और महिलाएं

  • औद्योगिक श्रमिकों को

  • अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य

  • बड़ी आपदाओं जैसे हिंसा, बाढ़, सूखा, भूकंप, औद्योगिक आपदा से पीड़ित लोगों को

  • विकलांगों को

  • ऐसे लोग जिनकी वार्षिक आय 50 हजार से ज्यादा न हो

  • बेरोजगार व अवैध मानव व्यापार से प्रभावित लोग

Share it
Top