Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

भ्रष्टाचार के आरोपों पर नीतीश समेत इन नेताओं ने दिया इस्तीफा, जानिए

नीतीश कुमार बने बिहार के छठी बार मुख्यमंत्री।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर नीतीश समेत इन नेताओं ने दिया इस्तीफा, जानिए

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले कुछ महीनों से चली आ रही तमाम घटनाक्रम पर विराम लगाते हुए शाम 6.40 बजे सीएम पद से इस्तीफा दे दिए।

नीतीश कुमार ने राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे के बाद नीतीश ने कहा कि हम ऐसे परिस्थितियों में आ गए थे जहां से सरकार चलाना मुश्किल हो गया था।

इसे भी पढ़ेंः- नीतीश को समर्थन देने के पीछे बीजेपी की ये है मंशा

देश के इतिहास की यह पहला मौका है जब किसी मुख्यमंत्री ने गठबंधन में शामिल पार्टी पर लग रहे आरोपों के चलते नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे दिया।

इसे भी पढ़ेंः- NDA कुर्सी तो बचा लेगा, लेकिन कीमत तो नीतीश भी चुकाएंगे

आइए जानते आरोपों के चलते नैतिकता के आधार पर किन-किन लोगों ने दिया है अपने पद से इस्तीफाछः-

टीटी कृष्णामाचारी

टीटी कृष्णामाचारी देश के चौथे वित्त मंत्री थे। उन्होंने 1958 में मुंद्रा घोटाले के बाद अपने पद से इस्तीफ दे दिया था। बताया जाता है कि कोलकाता के व्यवसायी हरिदास मुंद्रा की घाटे में चल रही 6 कंपनियों में एलआईसी ने 1 करोड़ 25 लाख रुपए से अधिक का निवेश किया था। कुछ दिनों बाद टीटी कृष्णामाचारी के वित्त बजट पास करने के बाद कंपनी का शेयर्स तेजी से गिरने लगा, जिससे एलआईसी को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।

लाल बहादुर शास्त्री

देश के पहले रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 1956 में तेलंगाना के महबूबनगर में हुए रेल हादसे में 112 लोगों की मौत के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि पीएम नेहरू ने इस्तीफा को स्वीकार नहीं किया। इस हादसे के तीन महीने के बाद फिर अरियालूर में रेल दुर्घटना में 114 लोगों की मौद गई थी। इस बार शास्त्री जी ने फिर से इस्तीफ दे दिया।

केशव देव मालवीय

1963 में खान और ईंधन मंत्री केशव देव मालवीय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनपर आरोप था कि उन्होंने चुनाव के लिए एक निजी कंपनी फंड जुटाने के लिए वित्तीय मदद मांगी थी।

वी. के. कृष्ण मेनन

चीन के साथ हुए 1962 के युद्ध में भारत की करारी हार के बाद देश के रक्षा मंत्री वी. के. कृष्ण मेनन ने पद से इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त लोगों में मेनन के खिलाफ गुस्से को देखते हुए प्रधानमंत्री नेहरू ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया था।

वी. पी. सिंह

बोफोर्स घोटाले का मामला सामने आने के बाद देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से रक्षा मंत्री वी. पी. सिंह की तल्खी इतनी बढ़ गई थी कि 1987 में वी. पी. सिंह ने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और साथ ही लोकसभा और कांग्रेस पार्टी भी छोड़ दिया।

लालकृष्ण आडवाणी

भारतीय जनता पार्टी के भीष्म पितामह कहे जाने वाले वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी को भी भ्रष्टाचार के आरोपों में इस्तीफा देना पड़ा था। 90 के दशक में जैन हवाला कांड में नाम सामने आने के बाद उन्होंने 1996 में संसद की सदस्यता छोड़ दी थी। इस केस में क्लीनचिट मिलने के बाद आडवाणी जी फिर से 1998 में संसद बने। बता दें कि इसी कांड में जेडीयू के नेता शरद यादव का भी नाम सामने आया था जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

Next Story
Top