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आखिर किस डर से इंदिरा गांधी ने जबरदस्ती देश में लगाया आपातकाल, ये थी वजह

इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल की घोषणा की थी। आपातकाल को 42 साल हो गए हैं। जो कभी ना भुलाया जाने वाला इतिहास बन चुका है।

आखिर किस डर से इंदिरा गांधी ने जबरदस्ती देश में लगाया आपातकाल, ये थी वजह

साल 1975 में आज ही का दिन भारतीय राजनीति के इतिहास सबसे काले दिवस के रूप में दर्ज है। आज ही के दिन यानी 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की थी। देश में आपातकाल लगाने के पीछे आखिर इंदिरा गांधी की क्या मजबूरी थी। जिसके चलते उन्हें यह फैसला लेना पड़ा।

यह है आपातकाल लगाने की असल वजह

दरअसल 1971 में हुए लोकसभा चुनाव में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता राज नारायण इंदिरा गांधी के समक्ष प्रमुख उम्मीदवार थे। लेकिन चुनाव परिणामों इंदिरा गांधी ने राज नारायण को 11 लाख से भी अधिक वोटों से मात दी।

जिसे लेकर राज नारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। याचिका में इंदिरा गांधी पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर और कानून की अवहेलना कर चुनाव में जीत हासिल की है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया इंदिरा का चुनाव

आपको बता दे कि इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जगमोहन लाल सिन्हा कर रहे थे। जज जगमोहन ने शिकायकर्ता जय नारायण की याचिका पर सुनवाई करते हुए 12 जून 1975 को फैसला सुनाते हुए इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया।

यही नहीं जज जगमोहन ने इंदिरा गांधी के खिलाफ दायर सबूतों के आधार पर उनके अगले छह सालों तक किसी भी चुनाव में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया। जज ने इंदिरा गांधी को इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 20 दिनों का समय दिया।

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

इंदिरा गांधी ने चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। हालांकि इंदिरा गांधी पहले से ही जानती थी कि जिस जन-प्रतिनिधी कानून को तोड़ने का आरोप उनपर लगा है, उसमें संशोधन किए बगैर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने वाली।

जानकार बताते है कि इसी के चलते इंदिरा गांधी ने जन-प्रतिनिधी कानून में कुछ बदलाव किए। और संशोधित जन-प्रतिनिधि कानून को पीछे की तारीख से लागू कर दिया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद फैसला इंदिरा गांधी के पक्ष में दिया गया।

इसी महीन 12 जून को गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजें आएं जिसमें कांग्रेस की बुरी तरह से हार हुई। और जिसके बाद से ही विपक्ष इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग करने लगा। इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में धरना-प्रदर्शन होने लगे।

आपातकाल की घोषणा

कांग्रेस और इंदिरा गांधी के खिलाफ जनता में बढ़ते रोष को देखते हुए 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगाने की घोषणा कर दी गई। आपको बता दे कि इंदिरा गांधी के देश में आपातकाल लगाने को लेकर ना केवल विपक्ष ब्लकि कांग्रेस के भीतर भी नेताओं में इस फैसले को लेकर रोष बढ़ने लगा।

कांग्रेस को झटका

जिसके चलते वरिष्ठ कांग्रेस नेता बाबू जगजीवन राम ने कांग्रेस पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया। बता दे कि आपातकाल 19 महीनों तक चला जिसके दौरान जबरदस्ती मनमाने फैसले जनता पर थोपे गए। कई नेताओं को जबरन जेल भेज दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म कर दिया गया।

19 महीने के बाद आपातकाल की समाप्ति के बाद एक बार फिर से देश में लोकसभा चुनाव कराए गए। जिसमें कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। आपातकाल के बाद हुए चुनाव के बाद देश में जनता पार्टी की सरकार बनी और मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने।

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