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जानिए कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान और उनसे जुड़ा 100 साल पुराना विवाद

म्यांमार के रखाइन प्रान्त में बसे बांग्लादेशी मजदूर मुस्लिमों को रोहिंग्या मुसलमान कहा जाता है, इन्हें 19वीं शताब्दी में रखाइन प्रांत में ब्रिटिश शासकों ने बसाया था।

जानिए कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान और उनसे जुड़ा 100 साल पुराना विवाद

रोहिंग्या मुस्लिमों का संबंध म्यांमार (बर्मा) से है। बताया जाता हैं कि 16वीं शताब्दी में रखाइन प्रांत में बड़ी संख्या में मुस्लिम रहते थे, उस दौरान म्यांमार में ब्रिटिश शासन था।

जब साल 1826 में ब्रिटिश-बर्मा युद्ध समाप्त हुआ तब अंग्रेजों ने अराकान पर कब्जा कर लिया था। उसके बाद से ही अंग्रेज शासकों हमारे पड़ोसी बांग्लादेश (तब के भारत) से मजदूरों को रखाइन लाते रहे।

म्यांमार के रखाइन प्रान्त में बसे इन्हीं मजदूरों को रोहिंग्या मुसलमान कहा जाता है, जबकि म्यांमार की मूल आबादी बहुसंख्यक बौद्ध हैं।

1948 में म्यांमार की आज़ादी के बाद से ही रोहिंग्या मुस्लिमों तथा बहुसंख्यक बौद्धों के बीच दंगे तथा खूनी झडपें होती रहीं हैं।

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लगभग 100 साल पुराने रोहिंग्या विवाद की आग ने 2012 में हिंसक रूप ले लिया था। इससे उत्तरी रखाइन में हुए दंगों में करीब 50 से ज्यादा मुस्लिम तथा करीब 30 बौद्ध मारे गये थे।

इस घटना के बाद ही म्यांमार सेना तथा स्थानीय पुलिस ने रोहिंग्याओं के विरुद्ध मिलकर सख्त प्रशासनिक कार्यवाही करते हुए रखाइन से खदेड़ दिया था।

रोहिंग्या मुसलमानों ने इस कार्यवाही से घबराकर जान बचाते हुए पड़ोसी देशों बांग्लादेश, थाईलैंड तथा भारत में घुसना शुरू कर दिया था।

आपको बता दें कि म्यांमार सरकार ने 1982 में एक राष्ट्रीयता कानून बनाया था जिसमें रोहिंग्या मुसलमानों का नागरिक दर्जा खत्म कर दिया था।

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केन्द्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक लगभग 40 हजार रोहिंग्या मुस्लिम भारत के अलग अलग राज्यों में अबैध रूप से रह रहे हैं जबकि यूएनएचसीआर के पास लगभग 14 हजार रोहिंग्याओं की अधिकारिक जानकारी मौजूद है।

भारत सरकार ने पहली बार देश में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्याओं को म्यांमार वापस भेजना आरंभ किया है, जिसकी पहली कड़ी में 4 अक्टूबर 2018 को 7 रोहिंग्या मुस्लिमों को म्यांमार के अधिकारियों को वापस मोरेह बॉर्डर पर सोंप दिया गया।

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