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जानें कब-कब लगा जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन, कभी हिंसा तो कभी आतंकवाद रहा जिम्मेदार

भाजपा और पीडीपी के बीच गठबंधन टूटने के बाद राज्य में एक बार फिर से राज्यपाल शासन लगा दिया गया है। राज्य में राज्यपाल शासन का इतिहास काफी पुराना है। कभी आतंकवाद तो कभी कट्टरवाद भी राज्यपाल शासन लगवाने के लिए जिम्मेदार रहे।

जानें कब-कब लगा जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन, कभी हिंसा तो कभी आतंकवाद रहा जिम्मेदार

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर राज्यपाल शासन लग गया है। कल, भाजपा ने पीडीपी से अपना गठबंधन तोड़ लिया था। जिससे राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौप दिया था।

जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन कई बार लगाया जा चुका है। राज्य में राज्यपाल शासन का इतिहास काफी पुराना है। जब-जब भारत सरकार को लगा कि राज्य के हालात खराब हो रहे है तब-तब वहां राज्यपाल शासन लगाया गया है।

जानें,जम्मू-कश्मीर में कब-कब लगा राष्ट्रपति शासन-

मार्च 1977 में लगा पहला राज्यपाल शासन

जम्मू-कश्मीर में पहली बार राज्यपाल शासन तब लगा जब कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस से अपना समर्थन वापस ले लिया था। इस दौरान राज्य में 105 दिनों तक शासन चला। इन 105 दिनों तक राज्य की कमान राज्यपाल एलके झा के पास रही।

मार्च 1986 में लगा दूसरा राज्यपाल शासन

राज्य में दूसरा राज्यपाल शासन तब लगा जब कांग्रेस ने कानून व्यवस्था की खराब होती हालत को मानकर राज्य सरकार से समर्थन वापस ले लिया।

तब भी कांग्रेस ने अपनी सहयोगी पार्टी नेशनल कांफेंस से समर्थन वापस लिया था। यह राज्यपाल शासन जम्मू-कश्मीर में 264 दिनों तक चला। इस दौरान राज्य की कमान राज्यपाल जगमोहन के हाथों में रही।

सबसे लंबा राज्यापल शासन, जब हिंसा चरम पर थी-

कश्मीर के इतिहास में सबसे लंबा राज्यपाल शासन जनवरी 1990 में लगा। उस समय कश्मीर में हिंसा चरम पर थी। राज्य में कट्टरता और आतंकवाद तेजी से फैल रहा था।

कश्मीरी पंडितों पर हमले हो रहे थे। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौप दिया। तब भी राज्य की कमान जगमोहन के हाथों में ही थी।

आतंकवाद और कट्टरता चरम पर होने की वजह से राज्य में चुनाव नहीं हो सके। यह राज्यपाल शासन 6 साल से ज्यादा चला। इसका समय 1990 से लेकर 1996 तक चला।

सबसे कम समय का राज्यपाल शासन

राज्य में चौथी बार राज्यपाल शासन सन् 2002 में लगा। राज्य में चुनाव हुए, जिसमें नेशनल कांफ्रेंस की हार हुई। राज्य के मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री बनने से इनकार कर दिया और अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौप दिया।

तब राज्य में 15 दिन तक राज्यपाल शासन लगा। इस दौरान राज्य की कमान जीसी सक्सेना के हाथों में रही। 15 दिन बाद 12 विधायकों का समर्थन लेकर पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तब जाकर राज्य में राज्यपाल शासन हटा।

जब अमरनाथ यात्रा पर हुआ विवाद और लगा राज्य में 5वीं बार राज्यपाल शासन-

5वीं बार राज्य में राज्यपाल शासन जुलाई 2008 से लेकर जनवरी 2009 तक चला। तब राज्य में अमरनाथ भूमि विवाद अपने चरम पर था। इसके चलते पीडीपी ने राज्य सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। उस वक्त यह शासन 178 दिन तक चला। तब राज्य की कमान एनएन वोहरा के हाथों में रही।

जब किसी भी पार्टी को नहीं मिला बहुमत तब लगा राज्यपाल शासन-

2014 में राज्य में चुनाव हुए पर किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। जब तक नई सरकार नहीं बनी तब तक राज्य की कमान राज्यपाल के हाथों में रही।

जब हुई मुख्यमंत्री की मौत, तब लगा राज्यपाल शासन-

2016 में राज्य के मुख्यमंत्री मुफ्ती सईद की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद राज्यपाल शासन लगा दिया गया। उस वक्त राज्य की सत्ता एनएन वोहरा के हाथों में रही।

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