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राइट टू प्राइवेसी: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कानूनी विशेषज्ञों की राय

पीठ के सभी नौ सदस्यों ने एक स्वर में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया।

राइट टू प्राइवेसी: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित करने के उच्चतम न्यायालय के अभूतपूर्व फैसले का आज स्वागत करते हुए इसे 'प्रगतिशील' करार दिया और कहा यह ‘मूलभूत अधिकार' है।

न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने हालांकि कहा कि पूरे फैसले और न्यायालय की ओर से दिए गए कारणों का पूरा अध्ययन करने के बाद ही यह आकलन किया जा सकेगा कि इस फैसले का आधार योजना पर क्या असर पड़ेगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता सोली सोराबजी ने कहा- यह उच्चतम न्यायालय के 'अच्छे दृष्टिकोण' को दिखाता है जो कि अपने पहले के फैसले को पलटने में जरा भी नहीं हिचकिचाया।

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पूर्व अटॉर्नी जनरल ने कहा- यह बेहत प्रगतिशील निर्णय है और लोगों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करता है। निजता एक मौलिक अधिकार है जो कि प्रत्येक व्यक्ति में अंतरनिहित है।

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा- यह उत्सव मनाने का दिन है।' इंदिरा ने उम्मीद जताई कि अब देश के नागरिक किसी भी प्रकार की तांक-झांक से सुरक्षित रहेंगे।

भाजपा के प्रवक्ता एवं वरिष्ठअधिवक्ता अमन सिन्हा ने कहा- यह अच्छा फैसला है। उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार की घोषणा की है लेकिन कहा है कि अन्य मैलिक अधिकारों की भांति इस पर भी कुछ तर्कसंगत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। हम पूरे फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

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प्रधान न्यायाधीश जे. एस. खेहर की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसले में कहा कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पूरे भाग तीन का स्वाभाविक अंग है।

पीठ के सभी नौ सदस्यों ने एक स्वर में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया। इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर आया यह फैसला विभिन्न जन-कल्याण कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा आधार कार्ड को अनिवार्य करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा हुआ है। कुछ याचिकाओं में कहा गया था कि आधार को अनिवार्य बनाना उनकी निजता के अधिकार का हनन है।

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