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सरदार सरोवर बांध: 9 हजार से ज्यादा गांवों तक पहुंचेगा पानी, पैदा होगी 100 करोड़ यूनिट बिजली

इस बांध की स्टोरेज क्षमता 4.73 मिलियन क्यूबिक मीटर है।

सरदार सरोवर बांध: 9 हजार से ज्यादा गांवों तक पहुंचेगा पानी, पैदा होगी 100 करोड़ यूनिट बिजली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात में पिछले कई दशकों से तमाम विवादों में घिरे रहे सरदार सरोवर नर्मदा बांध प​रियोजना का आज उद्घाटन किया।

उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जल ही हमारा जीवन है, जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस सरोवर की परिकल्पना सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1946 में ही की थी। हालांकि इस पर काम 1970 के दशक से ही प्रारंभ हो पाया। इस बांध प​रियोजना और इस पर बनी विद्युत परियोजना से चार राज्यों गुजरात, महाराष्ट, राजस्थान और मध्य प्रदेश को लाभ मिलेगा।
सरदार सरोवर बांध के बारे में 6 विशेष बातें
1. इस बांध की आधारशिला भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 5 अप्रेल 1961 में रखी थी। यूएस के ग्रैंड कोली बांध के बाद ये दूसरे नंबर पर दुनिया का सबसे बड़ा बांध होगा।
2. इस बांध के 30 दरवाजे हैं और हर दरवाजे का वजन 450 टन है। एक दरवाजे को बंद करने में 1 घंटे का समय लगता है।
3. ये बांध अब तक 16,000 करोड़ की कमाई कर चुका है। जो इसके स्ट्रक्चर पर हुए खर्च से तकरीबन दोगुना है।
4. इस बांध की स्टोरेज क्षमता 4.73 मिलियन क्यूबिक मीटर है।

5. 1985 में इस बांध के निर्माण का विरोध मेधा पाटेकर समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया था।
6. यह देश में बना सबसे ऊंचा बांध है जिसकी ऊंचाई 138 मीटर है।
2016-17 के दौरान बांध से 320 करोड़ यूनिट बिजली पैदा की गई। अब ज्यादा पानी जमा होने से 40 फीसदी ज्यादा बिजली पैदा की जा सकती है। सरदार सरोवर डैम से बनी बिजली का 57 फीसदी महाराष्ट्र को, 27 फीसदी मध्य प्रदेश को और 16 फीसदी गुजरात को मिलेगा।

महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात को मिलेगा ये फायदा
बता दें कि बांध से महाराष्ट्र के 37,500 हेक्टेयर क्षेत्र तक सिचाईं की सुविधा होगी। राजस्थान के दो सूखा प्रभावित जिले जालौर और बाड़मेर तक 2,46,00 हेक्टेयर जमीन तक पानी पहुंचेगा। साथ ही गुजरात के 9,633 गांवों तक पीने का पानी पहुंचेगा।
क्यों हुआ बांध का विरोध
मेधा पाटेकर समेत अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना था कि इस बांध के निर्माण से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खारगोन जिलों के 192 गांवों, धर्मपुरी, महाराष्ट्र के 33 और गुजरात के 19 गांव इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।
इस डैम का उद्घाटन गुजरात के सूखाग्रस्त इलाकों में पानी पहुंचाने और मध्यप्रदेश के लिए बिजली पैदा करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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