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सु्प्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का क्या है नियम, जानें और कई बातें

भारतीय संविधान में न्यायधीशों पर महाभियोग चलाने को लेकर पूरी जानकारी संविधान की धारा 124(4) में मिलती है। देश के चीफ जस्टिस पर महाभियोग चलाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होती है।

सु्प्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का क्या है नियम, जानें और कई बातें
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महाभियोग का इस्तेमाल देश के राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायधीशों को उनके पदों से हटाने के लिए किया जाता है। भारतीय संविधान की धारा 61,124 (4), (5),217 और 218 में इसका उल्लेख किया गया है। आपको बता दें कि इसके इलावा मुख्य न्यायधीश, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के किसी भी जज को हटाने का अधिकार केवल भारत के राष्ट्रपति के पास ही।

भारतीय संविधान में न्यायधीशों पर महाभियोग चलाने को लेकर पूरी जानकारी संविधान की धारा 124(4) में मिलता है। बता दें कि महाभियोग का सिर्फ उन हालातों में लाया जाता है जब देश के भीतर संविधान की किसी विशेष धाराओं के विपरीत उनका उल्लघंन हो रहा हो।

या उक्त तीनों पदों में आसिन किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ दुर्व्यवहार या उनके शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम साबित होने पर कथित पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ महाभियोग चलाया जा सकता हैं।

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भारतीय संविधान के मुताबिक अगर किसी परिस्थति में महाभियोग चलाने की आवश्यकता पड़ती है तो इसके लिए संविधान के नियमों के अनुसार महाभियोग प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता हैं।

महाभियोग के लिए शर्तो का पूरा होना अनिवार्य

1. लोकसभा में महाभियोग पेश करने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर की आवश्यकता पड़ती हैं।

2. वहीं राज्यसभा में महाभियोग पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर की आवश्यकता पड़ती हैं।

3. महाभियोग के संसद में पेश होने के बाद सदन के स्पीकर या अध्यक्ष उस प्रस्ताव को स्वीकार कर उसकी जांच के लिए एक तीन सदस्य जांच समिति का गठन करते हैं।

4. नियमों के मुताबिक इस तीन सदस्य जांच समिति में एक सदस्य सुप्रीम कोर्ट के जज का होना अनिवार्य हैं। वहीं दूसरे सदस्य के तौर पर हाई कोर्ट के जज को शामिल किया जाता हैं।

जहां तक जांच समिति के तीसरे सदस्य का सवाल है उसका चयन स्पीकर या अध्यक्ष द्वारा किया जाता हैं। स्पीकर किसी ऐसे व्यक्ति का चयन करते है जो काफी प्रसिद्ध हो।

कैसे चलती है महाभियोग की कार्यवाही

1. जब भी महाभियोग का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में लाया जाता हैं तो ऐसे में दोनों सदनों के अध्यक्ष मिलकर फिर से एक संयुक्त जांच समिति का चयन करते हैं।

2. जांच समिति के द्वारा जांच पूरी होने पर समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर या राज्य सभा अध्यक्ष को सौंप देती हैं।

3. अगर जांच में कथित पदाधिकारी दोषी पाया जाता है तो इसके बाद सदन में वोटिंग कराई जाती हैं।

4. महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के लिए उसे सदन के कुल सांसदों का बहुमत हासिल होना चाहिए। या वोट फिर वोट देने वाले सांसदों में कम से कम दो तिहाई सांसदों का समर्थन मिलना जरूरी हैं।

5. अगर संसद के दोनों ही सदनों में यह प्रस्ताव पारित हो जाए तो इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेजा जाता हैं।

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