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कई मायनों में ऐतिहासिक रहा बीता संसद सत्र

सत्र की शुरूआत 31 जनवरी को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई थी।

कई मायनों में ऐतिहासिक रहा बीता संसद सत्र

एनडीए की सरकार के बनने के बाद संसद के ज्यादातर सत्र विपक्ष की वजह से हंगामे की भेट चढ़ गए लेकिन मौजूदा सत्र में प्रधानमंत्री की कुशल रणनीति ने दोनो सदनों में कई महत्तवपूर्ण विधेयक पास करवाए। काफी लंबे समय से अटका जीएसटी बिल को भी एनडीए सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा में पास करवा दिया।

इस बार का संसदीय सत्र कई नई संसदीय परंपराओं का भी सूत्रपात रहा जैसे इस बार रेल बजट को आम बजट के साथ सम्मलित करने और वित्त वर्ष 2017-18 के आम बजट को पिछले वित्त वर्ष में पारित करने जैसे कई बड़े फैसले लिए गए।
गुरूवार को खत्म हुए इस बजट सत्र पर संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुनार ने कहा कि 'ये सत्र सबसे अधिक प्रोडक्टिव सत्रों में से एक है' और इस बार दोनों सदनों ने मिलकर 18 विधेयक पास किए हैं।
सत्र को दो भागों में बांटा गया था और इसकी शुरूआत 31 जनवरी को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई थी। इस बार संसद में 29 बैठक हुईं, सत्र में लोकसभा की कुल प्रोडक्टिविटी 114 प्रतिशत रही और राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी 92 प्रतिशत रही।
अनंत कुमार ने कहा संसद का ये सत्र संसद के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। इस बार के सत्र में कई मायनों में एतिहासिक रहा है। इस बार संसद का कुल 8 घंटा 12 मिनट खरीब हुआ जिसमें से कुछ समय चप्पलमार सांसद रवींद्र गायकवाड़ के मामले का निपटारा करने में गया।
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