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जानें कैसे पड़ी घाटी में आतंकवाद की नींव

भारत-पाक विभाजन के बाद ही दोनों देशों के बीच शुरू हो गई थी जंग।

जानें कैसे पड़ी घाटी में आतंकवाद की नींव
कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववादी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। घाटी कभी बंदूक की आवाज से गूंज रही है तो कभी सेना पर पत्थर बरसाते स्थनीय नागरिकों के वीडियो से। हालिया दिनों में स्‍थानीय नागरिकों के आतंकियों की ढाल की बनने की खबरें सबसे अधिक आई हैं।
आइए जानते हैं कश्मीर की जड़ों के बारे में। क्यों स्‍थानीय नागरिक अपनी सेना पर पत्‍थर बरसा रहे हैं। आखिर कैसे जम्मू-कश्मीर की शांत घटी में आतंकवाद की नींव पड़ी। वो कौन है जिसने कश्मीर की जनता के मन में जहर भर रखा है और भरता जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर की घाटी में बढ़ रही आतंकवाद की घटनाओं और पत्थरबाजी घटनाओं के पीछे पाकिस्तान का हाथ है, इस बात से कोई भी इंकार नहीं कर सकता। भारत-पाक के बीच कश्मीर मुद्दे पर 1947 से ही जंग की शुरुआत हो गई थी।
पाकिस्तान ने कश्मीर पर अधिग्रहण करने के लिए तीन बार भारत से उलझने की कोशिश की पर हर बार भारत ने उसे करारी शिकस्त दी है।
1971 में भारत से करारी शिकस्त मिलने के बाद पाक की काबुल स्थित पाकिस्तान मिलिट्री अकादमी में सैनिकों को इस हार का बदला लेने की कसम दिलाई गई और अगले युद्ध की तैयारियां जारी कर दी गईं।
इस बीच अफगानिस्तान में हालात बिगड़ने की वजह से पाक सेना 1971 से 1988 अफगानिस्तान से युद्ध में जुटी रही। इस युद्ध में पकिस्तान ने गुरिल्ला युद्ध के पैंतरे सीखे और अपने आप को युद्ध कौशल में निपुण बनाया।
1988 में पाक के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक ने भारत के खिलाफ 'ऑपरेशन टोपाक' के तहत एक योजना बनाई जिसका नाम था 'वॉर विद लो इंटेंसिटी।'
इस योजना के तहत कश्मीरियों के मन में अलगाववाद और भारत के प्रति नफरत पैदा कर उनके हाथों में भारत के खिलाफ हथियार थमाने थे।
अपनी इस योजना को सफल बनाने के लिए पाक ने भारत के पंजाब से शुरुआत की। पाकिस्तान ने इस मंशा से पाकिस्तानी पंजाब में सिखों को 'खालिस्तान' का सपना दिखाया और सिखों के एक हथियारबद्ध संगठन खड़ा किया।
भारत सरकार पाक की इस नापाक और कूटनीतिक चाल को समझ नहीं पाई और इस चक्रव्यूह में फंसती चली गई। स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार और उसके बदले की कार्रवाई के रूप में 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या हो गई।
इंदिरा की मौत के बाद देश की सत्ता राजीव गांधी के हाथ में आ गई। राजीव गांधी ने अपना सारा ध्यान कश्मीर की तरफ ना लगा कर पंजाब और श्रीलंका पर केन्द्रित किया।
इस वजह से एक बार फिर पाक के मन में कश्मीर अधिग्रहण की नापाक ख्वाहिश जाग गई और पाक ने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में लोगों के मन में भारत के खिलाफ जहर भरना शुरू किया और आतंकवाद की आग को सुलगाया।

पत्थरबाजी है 'ऑपरेशन टोपाक' का ही बदला स्वरुप

कश्मीर मुद्दे पर भारतीय राजनेताओं की लापरवाही की वजह से 'ऑपरेशन टोपाक' बिना किसी मुश्किल के स्थानीय लोगों के मन में जहर भरता रहा। इसके तहत पाक ने ना केवल घाटी में ही अशांति फैलाई बल्कि जम्मू व लद्दाख में भी अपनी शाखाएं फैलाईं।
कश्मीर में बढ़ते आतंकवाद की वजह लगभग 7 लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडित विस्थापित हो गए और जम्मू सहित देश के अन्य हिस्सों में जाकर बस
इसके बावजूद हजारों कश्मीरी पंडितों को जहां पाया गया वहीँ मार दिया गया। 'ऑपरेशन टोपाक' के ही तहत घाटी में गैर मुस्लिमों और शियाओं को वहां से खदेड़ना और जनता को बगावत के लिए उकसाना था।
इसी के तहत कश्मीर में खुलेआम पाकिस्तानी झंडे फहराए गए और भारत की खिलाफत की गई। आज भी सबसे बड़े आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (‌आईएसआईएस) अपने इन्हीं नापाक मंसूबों को कश्मीरियों में जिंदा रखने के लिए आतंकवाद के लिए फंडिंग कर रहा है और भारत की मुखालफत कर रहा है।
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