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बड़ा सवाल: जानिए किसकी देन है नीरव मोदी

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ देश के प्रमुख बैंक पंजाब नेशनल बैंक पीएनबी में 11400 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है।

बड़ा सवाल: जानिए किसकी देन है नीरव मोदी
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एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ देश के प्रमुख बैंक पंजाब नेशनल बैंक पीएनबी में 11400 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। जानिए नीरव मोदी को बनाने वाले की पूरी कहानी।

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ एक प्रमुख बैंक में 11400 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। लोग अभी ठीक से समझ भी नहीं पाए थे कि हीरों का व्यवसाय करने वाले नीरव मोदी ने इतनी बड़ी रकम के घोटाले को अंजाम कैसे दिया कि रोटोमैक पेन कम्पनी के मालिक विक्रम कोठारी के भी 5 सरकारी बैंकों के लगभग 500 करोड़ का लोन लेकर फरार होने की खबरें आने लगीं हैं।

बैंकों में पारदर्शिता के नियम

हो सकता है कि आने वाले दिनों में ऐसे कुछ और मामले सामने आए। क्योंकि कुछ समय पहले तक बैंकों में केवल खाते होते थे जिनमें पारदर्शिता की कोई गुंजाइश नहीं थी और ई बैंकिंग तथा कोर बैंकिंग न होने से जानकारियां भी बाहर नहीं आ पाती थीं। लेकिन अब अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बैंकों के लिए मौद्रिक नीतियों का निर्धारण करने वाला बैंक ऑफ इंटरनेशनल सैटलमेन्ट ने बैंकों में पारदर्शिता के लिए कुछ नियम बनाए हैं जिनके कारण बैंकों के सामने अपने खातों में पारदर्शिता लाने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है।

नोटबंदी से आम आदमी परेशान

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के भी इस साल जनवरी में सूचना देने के अपने फार्मेट में बदलाव करने से इस घोटाले का मार्च तक सामने आना वैसे भी लगभग निश्चित ही था। नोटबंदी के दौरान बैंकों में जो हुआ वो किसी से छिपा नहीं है, आम आदमी बाहर लाइनों में खड़ा रहा और अन्दर से लेने वाले नोट बदल कर ले गए।

छोटे कर्जदार हुए परेशान

इसी प्रकार किसी आम आदमी या फिर किसी छोटे मोटे कर्जदार के कर्ज न चुका पाने की स्थिति में बैंक उसकी सम्पत्ति तक जब्त करके अपनी रकम वसूल लेते हैं लेकिन बड़े-बड़े पूंजीपति घरानों के बैंक से कर्ज लेने और उसे नहीं चुकाने के बावजूद उन्हें नए कर्ज पे कर्ज दे दिए जाते हैं।

पीएनबी ने आरबीआई को नहीं दी जानकारी

नीरव मोदी के मामले में पीएनबी जो देश का दूसरे नम्बर का बैंक है, ने भी कुछ ऐसा ही किया। नहीं तो क्या कारण है कि 2011 से नीरव मोदी को पीएनबी से बिना किसी गारंटी के गैरकानूनी तरीके से बिना बैंक के साफ्टवेयर में एन्ट्री करे लेटर ऑफ अन्डरटेकिंग, एलओयू जारी होते गए और इन 7 सालों से जनवरी 2016 तक यह बात पीएनबी के किसी भी अधिकारी या आरबीआई की जानकारी में नहीं आई।

सलाना रिपोर्ट में हुआ फर्जीवाड़ा

हर साल बैंकों में होने वाले ऑडिट और उसके बाद जारी होने वाली ऑडिट रिपोर्ट इस फर्जीवाड़े को क्यों नहीं पकड़ पाई? यहां यह जानना रोचक होगा कि बात एक या दो एलओयू की नहीं बल्कि 150 एलओयू जारी होने की है। इससे भी अधिक रोचक तथ्य यह है कि एक एलओयू 90-180 दिनों में एक्सपायर हो जाता है और अगर कोई कर्ज दो साल से अधिक समय में नहीं चुकाया जाता तो बैंक के ऑडिटर्स को उसकी जानकारी दे दी जाती है तो फिर नीरव मोदी के इस केस में ऐसा क्यों नहीं हुआ।

किसी को नहीं लगी भनक

इतना ही नहीं एक बैंक का चीफ विजिलेन्स अधिकारी बैंक की रिपोर्ट बैंक के मैनेजर को नहीं बल्कि भारत के चीफ विजिलेन्स कमिशन को देता है लेकिन इस मामले में किसी भी विजिलेन्स अधिकारी को 7 सालों तक पीएनबी में कोई गड़बड़ दिखाई क्यों नहीं दी। इसके अलावा हर बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टरस की टीम में एक आरबीआई का अधिकारी भी शामिल होता है, लेकिन उन्हें भी इतने साल इस घोटाले की भनक नहीं लगी। लेकिन आश्चर्य है कि जनवरी 2018 में यह घोटाला सामने आने से कुछ ही दिन पहले नीरव मोदी को इस खेल के खत्म हो जाने की भनक लग गई जिससे वो और उसके परिवार के लोग एक एक करके देश से बाहर चले गए। अब बड़ा सवाल कि नीरव मोदी को नीरव मोदी बनाने वाला कौन है।

बड़े अधिकारियों की मिलीभगत

ऐसा नहीं है कि हमारे देश के बैंकों में कर्ज देने का सिस्टम न हो लेकिन कुछ मुठ्ठी भर ताकतों के आगे पूरा सिस्टम ही फेल हो जाता है। जिस प्रकार पीएनबी के तत्कालीन डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी सिंगल विंडो ऑपरोटर मनोज खरात को गिरफ्तार किया है और यह जानकारी सामने आई है कि पीएनबी के कुछ और अफसरों की मिलीभगत से इस घोटाले को अंजाम दिया गया, यह स्पष्ट है कि सारे नियम और कानून सब धरे के धरे रह जाते हैं और करने वाले हाथ साफ करके निकल जाते हैं क्योंकि आज तक कितने घोटाले हुए, कितनी जांचें हुईं, अदालतों में कितने मुकदमे दायर हुए, कितनों के फैसले आए। दरअसल आज देश में सिस्टम केवल बैंकों का ही नहीं न्याय व्यवस्था समेत हर विभाग का फेल है। इसलिए सिस्टम पस्त, लेकिन अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

शार्ट कट्स चुनने वाले नीरव मोदी जैसे लोग

जीवन में आगे बढ़ने के लिए शार्ट कट्स को चुनने वाला हर शख्स आज नीरव मोदी बनने के लिए तैयार बैठा है, लेकिन जबतक सिस्टम के अन्दर बैठा व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह ईमानदारी से करेगा वो उसे नीरव मोदी नहीं बनने देगा। इसलिए नीरव मोदी जैसे लोग जो इस देश के अपराधी हैं, उस आम आदमी के गुनाहगार हैं जिनकी गाढ़ी मेहनत की कमाई से इस राकम को वसूला जाएगाए उससे अधिक दोषी तो सिस्टम के भीतर के वो लोग हैं जो नीरव मोदी जैसे लोगों को बनाते हैं। इसलिए जबतक इन नीरव मोदी के निर्माताओं पर कठोर कार्यवाही नहीं की जाएगी देश में नए चेहरों और नए नामों से और नीरव मोदी पैदा होते रहेंगे।

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