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आपातकाल के दौरान मीसा कानून कैसे बना प्रदर्शनकारियों के लिए मुसीबत, जानें इस कानून से जुड़ी अहम बातें

आपातकाल के 43 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि आपातकाल में किस तरह से इंदिरा गांधी ने मीसा कानून का दुरुपयोग कर हजारों लोगों को जबरन जेल में ठूस दिया था।

आपातकाल के दौरान मीसा कानून कैसे बना प्रदर्शनकारियों के लिए मुसीबत, जानें इस कानून से जुड़ी अहम बातें

आपातकाल के 43 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आपातकाल और उससे जुड़े किस्सों को याद कर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अपने अनुभव शेयर किए।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि किस तरह से इंदिरा गांधी ने मीसा कानून का दुरुपयोग कर हजारों लोगों को जबरन जेल में ठूस दिया। आखिर क्या है ये मीसा कानून और कैसे इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान इस कानून का इस्तेमाल अपने विरोधी को दबाने के लिए किया।

जाने मीसा कानून के बारे में

- मीसा यानी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम कानून साल 1971 में लागू किया गया था।

- मीसा कानून के तहत राजनीतिक विरोधियों को अनिश्चित काल के लिए जेल में बंद किया गया।

- मीसा कानून के तहत पुलिस को प्रदर्शनकारियों को बिना वारंट खोज एवं संपत्ति की जप्ति, उनकी टेलीफोन वार्तालाप सुनने, रिकार्डिंग करने के अधिकार दिए गए थे।

- लेकिन मीसा कानून का इस्तेमाल आपातकाल के दौरान कांग्रेस विरोधियों, पत्रकारों सामाजिक कार्यकर्ताओं को जबरन जेल में डालने के लिए किया गया।

- इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान मीसा कानून में बदलाव कर इसका इस्तेमाल अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया।

- मीसा कानून के तहत जबरन एक लाख से भी ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

- मीसा कानून के तहत मीसाबंदियों को प्रताड़ित किया गया। और उनकी संपत्ति भी छीनी गई।

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