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महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग मोटर न्यूरोन की बीमारी से जिंदगी भर रहे पीड़ित, जानें इसके बारे में

स्टीफन हॅाकिंग एक गंभीर बिमारी से ग्रस्त थे। वह काफी लंबे समय से मोटर न्यूरान बीमारी नामक बीमारी की चपेट में थे। आपको बता दे कि स्टीफ़न हॅाकिंग ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्हें परेशानी होने लगी थी।

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग मोटर न्यूरोन की बीमारी से जिंदगी भर रहे पीड़ित, जानें इसके बारे में
दुनिया के महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने आज दुनिया को अलविदा कह दिया है। स्टीफन हॅाकिंग एक गंभीर बिमारी से जिंदगी भर पीड़ित रहे। वह काफी लंबे समय से मोटर न्यूरान बीमारी नामक बीमारी की चपेट में थे। आपको बता दे कि स्टीफ़न हॅाकिंग ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्हें परेशानी होने लगी थी।
एक बार जब स्टीफ़न हॅाकिंग छुट्टियां मनाने अपने घर आए हुए थे, तभी घर की सीड़ियों से उतरते वक्त वो बेहोश हो गए थे। शुरुआत में तो सभी ने इसे सिर्फ कमजोरी मान कर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन धीरे-धीरे ये परेशानी ज्याद होने लगी।
इसके बाद स्टीफ़न हॅाकिंग की जांच हुई तो उसमें पता चला कि उन्हें एक लाईलाज बीमारी हो गई है। जिस बीमारी का नाम मोटर न्यूरान बीमारी है।

जाने क्या है मोटर न्यूरान बीमारी?

यह एक लाईलाज बीमारी है, इस बीमारी में मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली साली नसे धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं। व्यक्ति चल-फिर पाने की स्थिति में भी नहीं रह जाता है।
इस बीमारी का ही एक रूप है एएलएस (Amyotrophic Lateral Sclerosis)। जिसके कारण शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते है। जिसके कारण मरीज अपंग हो जाता है।
आपको बता दे कि डॅाक्टरो ने करीब दो साल पहले ही बता दिया था कि बीमारी के चलते स्टीफ़न हॅाकिंग ओर दो साल जिंदा रहेंगे। क्योंकि अगले दो साल के भीतर स्टीफ़न हॅाकिंग का पूरा शरीर काम करना बंद कर देगा।
बीमारी बढ़ने पर उन्हें व्हीलचैयर का सहारा लेना पड़ गया। लेकिन उनकी यह चैयर एक स्मार्ट चैयर थी जो एक कंप्यूटर की तरह बनी है। जो उनके सिर, उनके हाथो और उनकी ऑखो के कंपन से ये बता देती है कि वो क्या बोलना चाहते है। और धीरे-धीरे बीमारी के चलते स्टीफ़न हॅाकिंग के शरीर ने काम करना बंद कर दिया। जिसके चलते उनकी मौत हो गई।

मोटर न्यूरान बीमारी के लक्षण

यह बीमारी होने के बाद केवल 5 प्रतिशत लोग ही ऐसे होते हैं जो एक दशक तक जीवित रह पाते हैं। बीमारी के शुरूआत में तो रोगी खुद खाना खा सकता है और उठ बैठ सकता है। लेकिन समय बीतने के साथ रोगी का चलना दूभर हो जाता है।
उसके सारे अंग काम करना बंद कर देते हैं। बोलने और सांस लेने और खाना निगलने तक में दिक्कत होने लगती है। ऐसा रीढ़ से जुड़ी कोशिकाओं जिसे मोटर न्यूरॉन कहते हैं वे काम करना बंद कर देते हैं।

मोटर न्यूरोन बीमारी का कारण और उपचार

दुनियाभर के केवल 5 प्रतिशत लोग ही इस बीमारी की चपेट में आते हैं। अगर घर में किसी को यह बीमारी है तो उसे इस बीमारी की चपेट में आने की संभावना अधिक रहती है। जिनको फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया नामक दिमागी बीमारी होती है, वे भी इस बीमारी की चपेट में आते हैं। ज्यादातर मामलों के लिए जीन ही जिम्मेदार होते हैं।
इसके लिए अभी तक कोई टेस्ट या डायग्नोसिस नहीं हुआ है बल्कि नर्वस सिस्टम के जरिये इसका निदान किया जाता है। महिलाओं की तुलना में यह पुरुषों को अधिक होता है। वर्तमान में इस बीमारी का कोई उपचार नहीं है।
बल्कि उपचार के जरिये इसके लक्षणों को कुछ समय के लिए कम किया जा सकता है। जैसे कि सांस लेने के लिए ब्रेदिंग मास्क का प्रयोग किया जाता है, खाने के लिए फीडिंग ट्यूब का प्रयोग किया जाता है।
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