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मन की बात: जानें अहमद अली के जीवन और समाज के प्रति किए गए कामों के बारे में

अहमद अली असम के करीमगंज जिले के मधूरबंद गांव के रहने वाले हैं। बता दें कि अहमद अली अपना और अपने परिवार के पेट पालने के लिए रिक्शा चलाने का काम करते हैं। अहमद को बच्चपन में ही अपनी गरीबी के चलते स्कूल की पढ़ाई को बीच में छोड़ना पड़ा था।

मन की बात: जानें अहमद अली के जीवन और समाज के प्रति किए गए कामों के बारे में
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो पर अपने मन की बात प्रोग्राम में जिन तीन लोगों के बारे में जिर्क किया था उन्हीं में से एक है असम के रहने वाले अहमद अली। अहमद अली की कहानी जितनी रोचक है उतनी ही प्रेरणादायक भी।
तभी तो खुद देश के प्रधानमंत्री ने रेडियो पर अपने भाषण में सूदूर असम के रहने वाले अहमद अली के निस्वार्थ सेवा भाव को बढ़ी ही उत्सुक्ता के साथ लोगों के सामने पेश किया। आइये आपको बताते है कि कौन है अहमद अली और समाज के लिए गए उनके कामों के बारे में।
अहमद अली असम के करीमगंज जिले के मधूरबंद गांव के रहने वाले है। बता दे कि अहमद अली अपना और अपने परिवार के पेट पालने के लिए रिक्शा चलाने का काम करते है। अहमद को बच्चपन में ही अपनी गरीबी के चलते स्कूल की पढ़ाई को बीच में छोड़ना पड़ा था।
उनके परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वो अहमद की स्कूल की फीस दे सके। जिस कारण अहमद को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पढ़ी। और उन्हें अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए वहीं रिक्शा चलाने का काम शुरू कर दिया।
बस उसी दिन अहमद ने इस बात का ऩिर्णय कर लिया और इसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया कि आज के बाद वो कोशिश करेंगे की उनके गांव से कोई भी बच्चा केवल पैसों की तंगी के चलते अपनी पढ़ाई बीच में ही ना छोड़नी पड़े।
पिछले चार दशकों में अहमद अली ने अपनी कड़ी मेहनत से मधूरबंद और उसके आस-पास के इलाकों में 9 स्कूलों का निमार्ण कराया। जिसमें तीन प्राथमिक स्कूल, पांच माध्यमिक स्कूल और एक हाई स्कूल शामिल है।
अहमद अली ने पहला स्कूल 1978 में बनवाया था। जिसके लिए अहमद ने अपनी जमीन को बेचना पड़ा था, इसके इलावा गांव के लोगों ने भी अहमद अली की इस काम में थोड़ी मदद की थी।
अहमद अली का लक्ष्य 10 स्कूलों का निर्माण करना था जिसमें से अहमद 9 स्कूलों का निर्माण कार्य पहले ही पूरा करवा चुके है। अब अहमद अली का अगला लक्ष्य इलाके में एक विश्वविद्दालय बनाने का है।
अहमद कहते है कि मैं अब बूढ़ा हो रहा हूं पर मेरी इच्छा है कि शिक्षा के माध्यम से मेरे गांव का विकास हो। अहमद ने आगे कहा कि अशिक्षा एक अभिशाप है और गरीबी का मुख्य कारण है। ओर बहुत से लोग अशिक्षा के कारण इस अभिशाप का शिकार होते है।
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