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इन 9 जजों की बेंच ने लगाई ''राइट टू प्राइवेसी'' पर मुहर, जानिए इस केस से जुड़ी बारिक से बारिक बातें

केन्द्र ने भी निजता को एक अनिश्चित और अविकसित अधिकार बताया था ,गरीब लोगों को जिसे जीवन, भोजन और आवास के उनके अधिकार से वंचित करने के लिये प्राथमिकता नहीं दी जा सकती है।

इस दौरान न्यायालय ने भी सभी सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों से निजी सूचनाओं को साझा करने के डिजिटल युग के दौर में निजता के अधिकार से जुडे अनेक सवाल पूछे।

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