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13 साल की उम्र में तालिबान से लिया था लोहा, 6 साल बाद अपने वतन लौटी मलाला, पढ़िए मलाल की कहानी

तालिबाल के अत्याचारों से परेशान ही कर मलाल ने एक छद्म नाम 'गुल मकई' के नाम से बीबीसी ऊर्दू के लिए डायरी लिखना शुरू किया था। तब मलाला पहली बार दुनिया की नज़रों में आई थी।

मलाल ने अपनी इस डायरी में पाक में तालिबान द्वारा किए जा रहे कुकृत्यों का वर्णन किया था। मलाला ने अपनी डायरी में लिखा था, 'आज स्कूल का आखिरी दिन था इसलिए हमने मैदान पर कुछ ज्‍यादा देर खेलने का फ़ैसला किया। मेरा मानना है कि एक दिन स्कूल खुलेगा लेकिन जाते समय मैंने स्कूल की इमारत को इस तरह देखा जैसे मैं यहां फिर कभी नहीं आऊंगी।'

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