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वायुसेना में युगपुरुष के नाम से जाने जाते हैं मार्शल अर्जन सिंह, ये हैं वजहें

मार्शल अर्जन सिंह वायुसेना का हिस्सा तब बने थे। जब देश आजाद भी नहीं हुआ था।

वायुसेना में युगपुरुष के नाम से जाने जाते हैं मार्शल अर्जन सिंह, ये हैं वजहें
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वायुसेना में युगपुरुष की संज्ञा से सुशोभित मार्शल अर्जन सिंह का 98 वर्ष की आयु में यहां राजधानी के सैन्य अस्पताल (आर एंड आर) में निधन हो जाने के बाद शनिवार को समूचे देश में दुख की लहर सी दौड़ गई है।

मार्शल की सेवानिवृति के बाद वायुसेना में अपनी सेवा की शुरुआत करने वाले बल के कई वरिष्ठ सेवानिवृत अधिकारियों का कहना है कि उनका निधन बेहद दुखद घटना है।

लेकिन उनकी प्रतिष्ठित छवि, काम के प्रति लगन-समर्पण, दमदार नेतृत्व क्षमता और चुनौतियों के दौर में वायुसेना के आधुनिकीकरण में निभाए गए अमूल्य योगदान की वजह से मार्शल का नाम इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगा।

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कभी रिटायर नहीं हुए मार्शल

वायुसेना के वरिष्ठ सेवानिवृत अधिकारी एयर मार्शल बी़ के़ पांडेण्य ने हरिभूमि से बातचीत में कहा कि मार्शल अर्जन सिंह वायुसेना की एक प्रतिष्ठित शख्सियत थे। साथ ही उन्हें वायुसेना का एकमात्र लंबी दीर्घआयु प्राप्त अधिकारी भी माना जाता है। जो अपने जीवनकाल के बाद भी वायुसेना परिवार में एक मार्गदर्शक के रुप में हमेशा जीवित रहेंगे।

मार्शल वायुसेना का हिस्सा तब बने थे। जब देश आजाद भी नहीं हुआ था। ब्रिटिश भारत में पाकिस्तान के साहिवाल के मांटगोमरी में शिक्षा लेने के बाद मार्शल 1938 में रॉयल एयरफोर्स कॉलेज क्रैनवेल (लंदन) में प्रवेश किया। इसके बाद दिसंबर 1939 में एक पायलट अधिकारी के रुप में नियुक्त किया गया।

मार्शल सबसे कम उम्र 44 वर्ष में वायुसेनाप्रमुख बने। इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें मार्शल की उपाधि के साथ पांच सितारा रैंक से सम्मानित किया। इसके बाद मार्शल कभी सेवानिवृत नहीं हुए और हमेशा वायुसेना में एक्टिव बने रहे।

एयर मार्शल पांडेण्य ने कहा कि मार्शल अर्जन सिंह तीनों सेनाओं (थलसेना, वायुसेना, नौसेना) में मार्शल जैसे शीर्ष रैंक तक पहुंचने वाले उन तीन चुनिंदा अधिकारियों की सूची में शामिल थे।

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इसमें मार्शल अर्जन सिंह के अलावा थलसेना से फील्ड मार्शल के़ ए‍म़ करियप्पा और फील्ड मार्शल सैम बहादुर मानेकशॉ शामिल हैं। वर्ष 2008 में सैम मानेकशॉ का निधन हो जाने के बाद अर्जन सिंह ही एकमात्र ऐसे अधिकारी थे। जो जीवित थे।

विस्तार के दौर में संभाली कमान

मार्शल अर्जन सिंह को दिसंबर 1939 में एक पायलट अधिकारी के तौर पर वायुसेना में नियुक्त किया गया था। 1962 में चीन के साथ लड़ाई के बाद मार्शल को 1963 में उप-वायुसेना प्रमुख बनाया गया।

1 अगस्त 1964 को वायुसेना की कमान मार्शल के हाथों में एयर मार्शल के रुप में सौंपी गई। इसके बाद 1965 की भारत-पाकिस्तान की लड़ाई में जब वायुसेना का पहली बार प्रयोग किया गया। तब मार्शल ने इसका नेतृत्व किया। यह वह दौर था। जब वायुसेना के पास आधुनिक विमान व इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर बहुत कुछ नहीं था। लेकिन बल के विस्तार की शुरूआत हो चुकी थी।

उन्होंने वायुसेना मुख्यालय में रहते-रहते ही बल के मैनपावर खासकर पायलटों की संख्या बढ़ाने से लेकर एयरमैन, ऑफिसर्स के प्रशिक्षण के लिए बनाए जा रहे नए-नए संस्थानों की शुरुआत करने जैसे कार्यों में अहम भूमिका निभाई।

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