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मतदान / यहां बनाई जाती है वोटर्स की उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही, जानिए खास बातें

मतदान के दौरान फर्जी वोटिंग या किसी व्यक्ति को दोबारा मतदान करने से रोकने के लिए उनकी उंगली पर स्याही लगाई जाती है। लेकिन क्या आपको पता हैं कि ये स्याही कहां और कैसे बनती है, और इस स्याही की ऐसी क्या विशेषता होती है कि मतदान के दौरान सिर्फ इसी स्याही का इस्तेमाल किया जाता है?

मतदान / यहां बनाई जाती है वोटर्स की उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही, जानिए खास बातें

मतदान के दौरान फर्जी वोटिंग या किसी व्यक्ति को दोबारा मतदान करने से रोकने के लिए उनकी उंगली पर स्याही लगाई जाती है।

लेकिन क्या आपको पता हैं कि ये स्याही कहां और कैसे बनती है, और इस स्याही की ऐसी क्या विशेषता होती है कि मतदान के दौरान सिर्फ इसी स्याही का इस्तेमाल किया जाता है?

कहां बनती है ये स्याही

- मैसूर पेंट्स एंड वाॅर्निश लिमिटेड नाम की कर्णाटक की कंपनी इस स्याही का निर्माण करती है।

- यह कंपनी कर्नाटक सरकार की है और देश में होने वाले हर चुनाव में स्याही यहीं से सप्लाई की जाती है।

- इस स्याही का निशान उंगली पर करीब एक महीने तक रहता है। मतदान में इस स्याही का पहली बार इस्तेमाल आज से करीब 56 साल पहले 1962 के आम चुनाव में हुआ था।

इस स्याही की विशेषता

- सूरज की रौशनी में आते ही इस स्याही का केमिकल रंग बदलता है

- इस स्याही को नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी आॅफ इंडिया के केमिकल फोर्मुले द्वारा तैयार किया जाता है।

- इस स्याही में मुख्य रूप से सिल्वर नाइट्रेटका उपयोग किया जाता है।

- इस स्याही का निर्यात मालदीव, मलेशिया, कंबोडिया, अफगानिस्तान, मिस्र और दक्षिण अफ्रीका में किया जाता है।

- मतदाता के दौरान बाएं हाथ के अंगूठे के बाजू वाली उंगली के नाखून और चमड़ी पर इस स्याही को लगाया जाता है।

- ये स्याही सिल्वर नाइट्रेट में घुली होती है, इसलिए नहीं छूटती यह स्याही।

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