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जानिए तृप्ति देसाई के बारे में, जो सबरीमाला मंदिर में करना चाहती हैं प्रवेश

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश एंट्री को लेकर जारी विवाद के बीच आज को मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं।

जानिए तृप्ति देसाई के बारे में, जो सबरीमाला मंदिर में करना चाहती हैं प्रवेश

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश एंट्री को लेकर जारी विवाद के बीच आज को मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं।

इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता और भूमाता ब्रिगेड की संस्‍थापक तृप्ति देसाई सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के लिए पुणे से कोच्चि पहुंच गईं हैं। लेकिन एयरपोर्ट के बाहर भारी भीड़ जमा है, और उनका विरोध कर रही है।

बता दें कि तृप्ति देसाई ने ऐलान किया था कि वो सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करेंगी और भगवान अयप्पा के दर्शन करेंगी। वहीं प्रदर्शनकारियों ने धमकी देते हुए कहा कि चाहे जो भी हो जाए मंदिर की शांति को भंग नहीं होने देंगे।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि अगर तृप्ति देसाई मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश करेंगी तो उन्हें विरोधियों की लाश से होकर गुजरना होगा।

जानें कौन हैं तृप्ति देसाई..

भूमाता ब्रिगेड की संस्‍थापक तृप्ति देसाई का जन्म कर्नाटक के बेल्जियम जिले के निपानी तलुका में हुआ था। तृप्ति देसाई ने पुणे के विद्या विकास विद्यालय से पढ़ाई की इसके बाद उन्होंने मुंबई की एसएनडीटी महिला यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन में एडमिशन लिया।

पारिवारिक कारणों के चलते उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पढ़ी। इसके बाद में संस्था 'क्रांतीवीर झोपड़ी विकास संघ' की प्रेज़ीडेंट बनीं। महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए तृप्ति देसाई ने 2010 में उन्होंने भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड की स्थापना की।

वर्तमान समय में इस संस्था से 5000 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी चुकीं हैं। तृप्ति देसाई ने अन्ना हजारे के संगठन इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़कर समर्थन कर चुकीं हैं।

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तृप्ति देसाई 2007 में लाइम लाइट में तब आईं जब उन्होंने अजीत को-ओपरेटिव बैंक के चेयरमैन अजीत पवार पर पचास करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। तृप्ति देसाई साल 2012 में सिविक इलेक्शन में बालाजी नगर वार्ड से बतौर कांग्रेस उम्मीदवार खड़ी हुई।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि तृप्ति देसाई ने सबरीमाला मंदिर के अलावा मुंबई में हाजी अली दरगाह, महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर, नासिक के त्रयंबकेश्वर, कपालेश्वर और कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर के द्वार महिलाओं के लिए खुलवाने में संघर्ष किया है।

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