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हिंदू विवाह और निःशुल्क शिक्षा का अधिकार दिलाने वाले दलवीर भंडारी का ऐसा है रुतबा

नीदरलैंड के हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय अदालत में जस्टिस दलवीर भंडारी दोबारा जज चुन लिए गए हैं।

हिंदू विवाह और निःशुल्क शिक्षा का अधिकार दिलाने वाले दलवीर भंडारी का ऐसा है रुतबा

नीदरलैंड के हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय अदालत में जस्टिस दलवीर भंडारी दोबारा जज चुन लिए गए हैं। जस्टिस भंडारी को जनरल एसेंबली में 183 वोट मिले। जस्टिस भंडारी का मुकाबला ब्रिटेन के जस्टिस क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था।

आइए जानते हैं जस्टिस दलवीर भंडारी से जुड़ी कुछ अहम बाते-

जस्टिस दलवीर भंडारी का जन्म 1 अक्टूपर 1947 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। उन्होंने अपनी कानून की पढाई जोधपुर विश्वविद्यालय से की। जस्टिस भंडारी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश भी रह चुके है।

दलवीर भंडारी ने 19 जून 2012 को पहली बार इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के सदस्य के रूप में शपथ थी। आईसीजे पहले भंडारी कई अदालतों में उच्च पद पर काम कर चुके है।

जस्टिस भंडारी को भारत सरकार की तरफ से पद्मभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। जस्टिस भंडारी कई सालों तक भारतीय न्याय प्रणाली का हिस्सा रहें हैं।

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भारत में पढाई करने के बाद जस्टिस दलवीर भंडारी ने अमेरिका की शिकागो स्थित नार्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी से कानून में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है।

जस्टिस भंडारी एक जज होने के साथ एक अच्छे लेखक भी है। उन्होंने एक किताब लिखी है जिसका नाम ज्यूडिसियल रिफार्म्सः रीसेंट ग्लोबल ट्रेंड्स है।

जस्टिस भंडारी ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक फैसले दिए है। जिनमें हिंदू विवाह कानून 1955, बच्चों को अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा का अधिकार, रैनबसेरा आदि प्रमुख हैं।

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