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1857 अंग्रेजों के खिलाफ था पहला युद्ध, जानें कैसे

1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों में यह अफवाह थी कि 1853 की राइफल के कारतूस की खोल पर सूअर और गाय की चर्बी लगी हुई है।

1857 अंग्रेजों के खिलाफ था पहला युद्ध, जानें कैसे
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15 अगस्त 2017 को हम अपनी आजादी के 70 सालों को जश्न मनाने जा रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 1857 वो साल था जिसमें अंग्रेजी हुक्कूम के खिलाफ पहली जंग का ऐलान कर दिया था।

भले ही इस बाद को 160 साल बीत गए हों लेकिन सच तो यहीं है कि ब्रिटेन की ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ 1857 में ही कुछ सैनिकों ने बगावत शुरु कर दी थी।

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इस बगावत की शुरूआत पश्चिम बंगाल से हुई थी जहां पर गाय-सूअरों के मांस से बने कारतूसों को भारतीय सैनिकों ने मुंह से छीलने इंकार कर दिया। यह स्वतंत्रता के लिए संघर्षों के विशाल इतिहास का पहला विद्रोह था।

29 मार्च 1857 को मंगल पांडे जो इस विद्रोह का महानायक बने, अंग्रेजों के खिलाफ बगावती तेवर दिखाते हुए आगे बढ़ा और कारतूसों के जबरदस्ती इस्तेमाल के खिलाफ संघर्ष में मंगल पांडे ने एक अंग्रेज को गोली मार दी।

इस हत्या के आरोप में 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे और ईश्वर पांडे को फांसी की सजा सुना दी गई। भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी काल में ब्रिटिश उपनिवेशवादी शासन की स्थापना के केंद्र में सेना की भूमिका महत्वपूर्ण थी।

1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों में यह अफवाह थी कि 1853 की राइफल के कारतूस की खोल पर सूअर और गाय की चर्बी लगी हुई है। यह अफवाह हिन्दू एवं मुस्लिम दोनों धर्म के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रही थी। ये राइफलें 1853 के राइफल के जखीरे का हिस्सा थीं।

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सैनिकों की मौत की खबर देश में आग की तरह फैल गई और पश्चिम बंगाल के बाद मेरठ में भी सैनिकों की एक टुकड़ी ने इन कारतूसों को इस्तेमाल करने से मना कर दिया। जिसके बाद इस पहले स्वतंत्रता आंदोलन ने बगावती रूप ले लिया।

विद्रोह की यह आग कानपुर, लखनऊ, बरेली, बिहार के जगदीशपुर, झांसी, अलीगढ़, इलाहाबाद और फैजाबाद तक पहुंच गई और पूरे उत्तर भारत समेत भारत में हर जगह विद्रोह शुरु होने लगे।

और फिर 1857 से आजादी का सपना शुरू होते होती वो दिन भी आ गया जब देश आजाद हो गया। वो साल था 1947। 90 साल बाद भारत में हुए तेजी से विद्रोहों ने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

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