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अलनीनो 2014: अमेरिका और पेरू में होगी घनघोर बारिश, इंडिया व ऑस्ट्रेलिया में पड़ेगा सूखा

अगर इस साल अलनीनो का प्रभाव रहा तो भारत सहित समूचे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए चिंताजनक स्थिति बन सकती है।

अलनीनो 2014: अमेरिका और पेरू में होगी घनघोर बारिश, इंडिया व ऑस्ट्रेलिया में पड़ेगा सूखा
नई दिल्ली. इस बार मानसून को लेकर भारत ही नहीं बल्कि सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका सहित ऑस्ट्रेलिया और पेरु भी चिंतित हैं। चिंतित भी क्यों न हों, दुनियाभर के पर्यावरण विशेषज्ञ 2014 को अलनीनो का साल जो घोषित कर चुके हैं। अगर सच में यह साल अलनीनो के प्रभावों वाला होगा, तो यह भारत सहित समूचे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए चिंताजनक स्थिति बन सकती है। भारतीय मौसम विभाग ने भी इस साल मॉनसून में कमी का अनुमान जताया है। अलनीनो, मॉनसून और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालेगा।
क्या है अलनीनो-
पर्यावरण के गंभीर खतरों के बीच अलनीनो एक नया नाम है। इस समय दुनियाभर में अलनीनो का खतरा बढ़ने की खबरें आ रही हैं। असल में अलनीनो एक गर्म जलधारा है, जो प्रशांत महासागर में पेरू तट के सहारे प्रत्येक दो से सात साल बाद बहना प्रारंभ कर देती है। इस दौरान यह समुद्र में काफी गर्मी पैदा करती है, जिससे पेरूवियन सागर का तापमान 3.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ जाता है। अलनीनो दुनिया में तबाही का भीषण दृश्य उपस्थित करती रही है। अलनीनो एक स्पेनिश शब्द है, जिसका अर्थ है- शिशु। 25 दिसंबर को क्रिसमस के आसपास इसका पता लगने के कारण पेरू के मछुआरों ने इसका नामकरण अलनीनो किया। लेकिन यह शब्द जिस साल भी वैज्ञानिकों द्वारा प्रयोग किया जाता है, सभी देशों की सरकारों की नीदें उड़ जाती हैं।
प्रशांत महासागर के केंद्र और पूर्वी भाग में पानी का औसत सतही तापमान कुछ वर्ष के अंतराल पर असामान्य रूप से बढ़ जाता है। लगभग 120 डिग्री पूर्वी देशांतर के आसपास इंडोनेशियाइ द्वीप क्षेत्र से लेकर 80 डिग्री पश्चिमी देशांतर यानी मैक्सिको और दक्षिण अमेरिकी पेरू तट तक, संपूर्ण उष्ण क्षेत्रीय प्रशांत महासागर में यह क्रिया होती है। एक निश्चित सीमा से अधिक तापमान बढ़ने पर अलनीनो की स्थिति बनती है और वहां सबसे गर्म समुद्री हिस्सा पूरब की ओर खिसक जाता है। समुद्र तल के 8 से 24 किलोमीटर ऊपर बहनेवाली जेट स्ट्रीम प्रभावित हो जाती है और पश्चिमी अमेरिकी तट पर भयंकर तूफान आते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका पृथ्वी के समूचे जलवायु तंत्र पर असर पड़ता है।
नीचे की स्‍लाइड्स में जानि‍ए, अमेरिकी मौसम विज्ञान ने साल के शुरुआत में ही जताई थी अलनीनो की आशंका-

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