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साउथ और नॉर्थ कोरिया को 65 साल बाद एक साथ लाने के पीछे इस महिला ने निभाई अहम भूमिका, जानें 3 खास बातें

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने करीब 6 दशक के बाद दक्षिण कोरिया की सीमा को पार किया है। शुक्रवार को उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई इन से मुलाकात भी मुलाकात की।

साउथ और नॉर्थ कोरिया को 65 साल बाद एक साथ लाने के पीछे इस महिला ने निभाई अहम भूमिका, जानें 3 खास बातें

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने करीब 6 दशक के बाद दक्षिण कोरिया की सीमा को पार किया है। शुक्रवार को उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई इन से मुलाकात भी मुलाकात की।

लेकिन हर किसी के जहन में एक ही सवाल है कि आखिर ये दो दुश्मनी वाले देश एक साथ कैसे मीडिया के सामने आए और हाथों में हाथ लेकर चले भी। बता दें कि इन दो देशों को करीब लाने में किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग की अहम भूमिका नामी जा रही है।

किम की बहन की अहम भूमिका

किम की पत्‍नी के अलावा उनकी छोटी बहन किम यो जोंग ने फरवरी में अपने परिवार से पहली सदस्‍य थीं जो दक्षिण कोरिया गई थीं। वह यहां पर ओ‍लंपिक्‍स के उद्घाटन के लिए गई थीं। इसी दौरान उन्होंने दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जे इन ने उनकी बहन से कई घटों बातचीत की थी।

कौन है कीम की बहन जोंग

किम जोंग उन और किम यो जोंग दोनों एक ही माता-पिता की संतान हैं। इन दोनों की मां का नाम को योंग-हुई है। जो पिता किम जोंग इल की तीसरी पत्नी थीं। जिनकी मौत साल 2004 में हुई।

किम यो जोंग बचपन से लेकर अब तक अपने बड़े भाई किम जोंग उन की चहेती रही हैं और उनकी हत्या की साजिश रचने के बाद वो उनकी सिपहसहलार बन गई हैं। इस वक्त पार्टी में उनका कद दो नंबर पर है। उनकी छोटी बहन उनके साथ अक्सर फील्ड दौरों और पार्टी के प्रचार अभियान के दौरान भी दिखाई दी हैं।

दूसरे नंबर पर है बहन का औधा

किम यो जोंग को पार्टी में पोलित ब्यूरो का सदस्य बनाया है। जिसके बाद वो अब पार्टी में नंबर दो की पॉजिशन पर हैं। इस वक्त किम की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उनकी हाथों में है। मतलब साफ है कि अमेरिका को किम को मारने से पहले उसकी बहन से होकर गुजरना होगा।

65 साल में तीन बार मुलाकात

उत्तर और दक्षिण कोरिया 1953 के कोरियाई युद्ध के बाद दो अलग देश बने। पहली बार साल 2000 में दोनों देशों के बीच एक सम्मेलन हुआ। उसके बाद 2007 में समिट उत्तर कोरिया के प्योंग्यांग में आयोजित की गई। ये पहली बार है जब किम जोंग-उन बॉर्डर पार कर दक्षिण कोरिया गए हैं।

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