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शराब पर प्रतिबंध:अगले दस साल में केरल होगा शराब मुक्त राज्य, महिलाओं ने राज्य सरकार को कहा धन्यवाद

चांडी के इस कदम से राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा। इस निर्णय से सरकार को 8 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

शराब पर प्रतिबंध:अगले दस साल में केरल होगा शराब मुक्त राज्य, महिलाओं ने राज्य सरकार को कहा धन्यवाद
तिरूवनंतपुरम. मुख्यमंत्री के आवास में युनाटिड डेमोक्रेटिक फ्रंट(राज्य सरकार) ने दो घंटे की मीटिंग में एक्साइज पॉलिसी बनाई जिसमें केरल को अगामी 10 वर्षों मे शराब मुक्त किया जाएगा। मीटिंग के बाद मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने कहा कि हमारी सरकार यूडीएफ ने एकमत निर्णय से राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगाने की नीति बनाई है। यूडीएफ जल्द ही राज्य की केबिनेट से मंजूरी लेगी और केरल उच्च न्यायालय को अवगत करायेगी।
पहले कदम में 418 बार 1 अप्रैल 2015 तक बंद होंगे क्योंकि वह दो सितारा की सुविधा देने में असफल हैं और उन्होंने अपने लाइसेंस भी रिन्यू नही कराये हैं। इसी तरह राज्य में चल रहे 312 बार के लाइसेंस 31 मार्च 2015 के बाद रिन्यू नही होगा। 1 अप्रैल 2015 से सिर्फ पांच सितारा होटल को ही बार चलाने का लाइसेंस मिलेगा और राज्य में इस तरह के 23 होटल हैं। राज्य सरकार ने राज्य के 111 बीयर और वाइन पार्लर को चालू रहने दिया है यूडीएफ ने रीटेल सेक्टर में शराब बेचने वाले आउटलेट्स को भी बंद करने का फैसला किया है। हर महीने के पहले दिन और रविवार को शराब नहीं बेची जाएगी।
सरकार हर साल 10% ठेकों को बंद करेगी।केरल में प्रति व्यक्ति शराब की खपत की दर देश में सबसे ज्यादा है। यहां पर प्रति व्यक्ति 8.4 लीटर शराब पीता है। पंजाब दूसरे नम्बर पर है जहां प्रति व्यक्ति 7.9 शराब पीता है। जबकि पूरे देश में प्रति व्यक्ति 4 लीटर शराब पीता है।चांडी के इस कदम से राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा। इस निर्णय से सरकार को 8 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि हम यूडीएफ मेनिफेस्टो में किए गए वादे को पूरा कर रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि चांडी ने यह फैसला यूडीएफ के साथी दल केरला प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के प्रेजिडेंट वी.एम. सुधीरन के दबाव की वजह से लिया है। सुधीरन सत्ता के वैकल्पिक केंद्र के रूप में उभर रहें हैं।
शराब की बिक्री पर रोक के हिमायती सुधीरन को यूनियन मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस(एम) का भी साथ भी मिला हुआ है।कैथोलिक चर्च और मुस्लिम संस्थाओं ने भी मुख्यमंत्री से मांग की थी कि शराब पर बैन लगाया जाए। गुरुवार को सरकार द्वारा इस बात का ऐलान करने से पहले कार्डिनल क्लीमिस ने सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर उसने बंद किए गए बारों का लाइसेंस रिन्यू किया तो वह उखड़ने के लिए तैयार रहे।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'चांडी के पास एक बार फिर राजनीतिक पैठ बढ़ाने के लिए यही एक विकल्प बचा था। उन्होंने यह कदम उठाकर अपने को उपर कर लिया हैं।'

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