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राज्यपाल की फिसली जुबान, स्किप कर गए पीएम मोदी और RSS की अलोचना, कांग्रेस ने किया विरोध

केरल के राज्यपाल सदाशिवम ने बजट सत्र के पहले दिन अपने भाषण में मोदी सरकार और आरएसएस की आलोचना वाली टिप्पणी नहीं पढ़ी। जिसके बाद उनके बयान का आलोचना हो रही है।

राज्यपाल की फिसली जुबान, स्किप कर गए पीएम मोदी और RSS की अलोचना, कांग्रेस ने किया विरोध
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देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और केरल के राज्यपाल पी सदाशिवम विवादों में फंस गए हैं। केरल विधानसभा के बजट सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने मोदी सरकार और आरएसएस की आलोचना नहीं की।

दरअसल सोमवार को सदाशिवम ने बजट सत्र के पहले दिन सदन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने एक लिखित भाषण पढ़ा। इस भाषण के लिखित रूप मोदी सरकार और आरएसएस की आलोचना भी थी, लेकिन जब सदाशिवम भाषण पढ़ रहे थे तो उन्होंने मोदी सरकार औक आरएसएस की अलोचना नहीं की।
राज्यपाल के 89 मिनट के भाषण के बाद इसकी कॉपियां जो बांटी गईं थी उनमें उन्होंने अपने भाषण में से उन तीन लाइनों का जिक्र नहीं किया, जिसमें मोदी सरकार और आरएसएस की आलोचना वाली टिप्पणी थी।
इस पर सत्ता के पक्षधरो ने राज्यपाल और केंद्र सरकार को खुश करने के लिए आरोप लगाते हुए कहा है कि ऐसा करके सदाशिवम ने उन्हें खुश करने की कोशिश की हैं। वहीं दूसरी और विपक्षी दल कांग्रेस ने भी उन्हें निशाने पर लिया है। हालांकि भाजपा का कहना है कि राज्यपाल ने अपनी विवेकाधीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था।
बता दें कि सदाशिवम संबोधन शुरू करने के लिए जैसे ही खड़े हुए, नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला खड़े हो गए और कहा कि वह बोलना चाहते हैं और जोर देते हुए कहा कि विजयन सरकार ‘पूरी तरह विफल हो गई है।’
चेन्निथला ने कहा, ‘सरकार कानून व्यवस्था को संभालने, खाद्य पदार्थो का मूल्य बढ़ने से रोकने और चक्रवाती तूफान ओखी के बाद की स्थितियों को संभालने समेत सभी तरह से हर मोर्चे पर विफल हो गई।’
चेन्निथला के बैठने के बाद सतशिवम ने अपना भाषण शुरू किया और कहा कि पिछले कुछ वर्षो में केरल के खिलाफ कई सोशल और औपचारिक मीडिया अभियान हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘देश में बेहतरीन कानून व व्यवस्था वाले इस राज्य के खिलाफ कुछ संप्रादायिक ताकतों ने फर्जी आधार पर पूरे भारत में एक माह तक अभियान चलाया।’
राज्यपाल ने जोर देते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने केरल को देश का एकमात्र ऐसा राज्य घोषित किया है, जहां मानव विकास सूचकांक सबसे ज्यादा है। पिछले एक साल के दौरान राज्य के धर्मनिरपेक्ष परंपराओं पर गहरा आघात किया गया है।

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