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केन-बेतवा नदियों के जुड़ने से दूर होगा देश के कई राज्यों का सूखा

9,393 करोड़ रुपए की यह अपनी तरह की पहली परियोजना है।

केन-बेतवा नदियों के जुड़ने से दूर होगा देश के कई राज्यों का सूखा
नई दिल्ली. राजग सरकार द्वारा शुरु की जाने वाली केन-बेतवा अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना को सभी मंजूरियां मिल गई हैं। यह इसी साल में शुरू की जा सकती है। इससे 6.35 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और बुंदेलखड में पेयजल की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। 9,393 करोड़ रूपए की केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के 2017 की पहली तीमाही से शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस परियोजना से ओडिशा, बिहार एवं बंगाल में सूखा तथा बाढ़ की समस्याओं का समाधान होगा।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने शुक्रवार को बताया कि परियोजना को लगभग सभी मंजूरियां मिल गई हैं, जल्द ही इसके वित्तीय पोषण का मसला भी सुलझा लिया जाएगा। 9,393 करोड़ रुपए की यह अपनी तरह की पहली परियोजना है। इसके पहले चरण को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड, जनजातीय मामलों के मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने मंजूरी दे दी है।
हालांकि, पर्यावरण मंत्रालय ने परियोजना पर अभी अपनी अंतिम मंजूरी नहीं दी है क्योंकि वह ईएसी की सिफारिश को ध्यान में रखकर ही फैसला लेता है। उमा भारती ने इस परियोजना के शुरु होने पर खुशी जताई कि ईएसी ने परियोजना को मंजूरी दे दी है।
गौरतलब है कि केन-बेतवा के जुड़ने से 6.35 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई और लोगों को पेयजल मिलेगा। भारती ने कहा कि मानस -संकोष-तीस्ता-गंगा-महानदी-गोदावरी देश की नदी जोड़ों परियोजनाओं का मूल मंत्र है। इस परियोजना से ओडिशा, बिहार एवं बंगाल में सूखा तथा बाढ़ की समस्याओं का समाधान होगा। केन नदी जबलपुर के पास कैमूर की पहाडि़यों से निकलकर 427 किलोमीटर उत्तर की ओर बढ़़ने के बाद बांदा जिले में यमुना में मिलती है। बेतवा नदी मध्यप्रदेश के राससेन जिले से निकलकर 576 किलोमीटर बहने के बाद उत्तरप्रदेश के हमीरपुर में यमुना में मिलती है। इन दोनों की सहायक नदियों पर पहले से ही कई बांध बने हुए हैं।
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