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कश्मीर में नहीं रुक रही पत्थरबाजी, सख्ती से निपटने को सेना तैयार

दो महीने के बाद भी घाटी में हालात तनाव पूर्ण

कश्मीर में नहीं रुक रही पत्थरबाजी, सख्ती से निपटने को सेना तैयार
नई दिल्ली. बीते करीब दो महीने से ज्यादा वक्त बीत जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में बने हुए तनावपूर्ण हालात में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। दक्षिण-कश्मीर में लोगों का गुस्सा सशस्त्र बलों के खिलाफ चरम पर है। ऐसे में सेना आने वाले समय में पत्थरबाजों से सख्ती से निपटने के संकेत दे रही है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में ही बल प्रयोग की बात कही गई है।
सरकार के खुफिया ब्यूरो के सूत्रों के मुताबिक कश्मीर घाटी में मौजूद सेना की कुल 300 सैन्य पोस्टों की सुरक्षा को चाक-चौबंद कर दिया गया है। अगर कोई भी सेना की पोस्ट पर हमला करता है, सुरक्षा को चुनौती देता है, पोस्ट पर कब्जा करने की कोशिश करता है, जवानों पर हमला कर हथियार छीनने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सैन्य बल का प्रयोग किया जाएगा।
सख्त कार्रवाई के संदेश
रक्षा संबंधी जानकारों का कहना है कि घाटी में लंबे समय से तैनात पुलिस और पेरामिलिट्री बल के जवान पत्थरबाजी या ऐसे अन्य तनावपूर्ण माहौल में सख्त कार्रवाई करने से बचते हैं, लेकिन सेना सख्त कार्रवाई करने के संकेत दे रही है। अन्य बलों द्वारा तनाव के हालात में पैलेट गन से आंसू गैस के गोले छोड़कर भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की जाती है। ऐसा इनके द्वारा आमजन को होने वाले नुकसान में कमी लाने के लिए किया जाता है।
हरहाल में एजेंसी ने उसे पूछताछ के लिए भी बुलाया था। घाटी को लगातार अंशात रखने के लिए बड़ी संख्या में पाकिस्तान हवाला का पैसा अलग-अलग रास्तों से भारत भेजने में लगा हुआ है। उधर आतंकी संगठन जमात-उद दावा के मुखिया हाफिज सईद ने कुछ समय पहले अपनी एक रैली में कहा था कि कश्मीर घाटी में रहने वाली आसिया अंद्राबी ने उसे बहुत मदद की है।
एनआइए की पूछताछ
नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) सूबे के अलगाववादी नेताओं पर बीते कुछ समय से कड़ी नजर रखे हुए है। एक ओर आसिया अंद्राबी के बैंक खातों की निगरानी चल रही है। तो दूसरी ओर अलगाववादी नेता सईद अली शाह गिलानी का बड़ा बेटा नईम जांच एजेंसी के रडार पर है।नईम के खिलाफ कश्मीर में बीते कुछ समय से जारी हिंसा को भड़काने के लिए हवाला का पैसा बांटने का शक है।
दक्षिण-कश्मीर में समस्या
तनाव की ज्यादा स्थिति दक्षिण-कश्मीर में है। यहां आज भी कफ्यरू लगा हुआ है। अलगाववादियों के गढ़ के नाम से चर्चित कश्मीर का यह इलाका जनसंख्या बहुल है। सूबे की ज्यादातर युवा आबादी यहां रहती है जो बेरोजगार है। इंटरनेट, सोशल मीडिया का यहां बढ़-चढ़कर इस्तेमाल किया जा जा रहा है। युवाओं के मन में हिंसा की चिंगारी भरने के लिए इन माध्यमों का तेजी से प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही आजादी के नाम पर सेना व सशस्त्र बलों के खिलाफ विद्रोह के लिए इनका आसानी से इस्तेमाल भी जारी है। र्शीनगर और बनिहाल के बीच में पड़ने वाले इस इलाके में पुलवामा, र्शीनगर, अनंतनाग, अवंतीपुर और बड़गाम आते हैं।
अब महबूबा के काफिले पर फेंके गए पत्थर
हिंसा पर उतारू भीड़ ने आज मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के काफिले पर भी भारी पथराव किया। हालांकि मुख्यमंत्री इसमें बाल-बाल बच गईं पर उनके काफिले के कुछ वाहन जरूर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस बीच शनिवार को 57वें दिन हुर्रियत के लाल चौक और एयरपोर्ट पर कब्जे के आह्वान से निपटने के लिए सुरक्षाबलों को और सख्ती करनी पड़ी। इससे भड़की हिंसा में 200 से अधिक के जख्मी होने की खबर है जबकि सुरक्षाबलों के गुस्से का शिकार पत्रकार और फोटो पत्रकार भी हुए हैं। राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी शनिवार को हिंसा पर उतारू पथरबाजों की शिकार हो गई। बताया गया है कि उनके काफिले पर पत्थर फेंके गए, लेकिन उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ है। गौरतलब है कि वे अपने काफिले के साथ शनिवार को हिंसा के दौरान मारे गये लोगों के परिवारों से मिलने के लिये गई थी।
बताया गया है कि शनिवार की सुबह जैसे ही महबूबा अपने काफिले के साथ निकली, थोड़ी दूर पहुंचने के बाद ही उनके काफिले पर पत्थरों से हमला बोल दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने पूर्व में यह कहा था कि वे हिंसा में घायल व मारे गये लोगों के परिजनों से मुलाकात करने के लिये जायेगी।
हालांकि वे सुरक्षाकर्मियों के साथ पुलगाम और अन्य क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों से मिली भी। उन्होंने कहा कि घाटी में शांति बहाली के लिये उनकी सरकार हर हाल में प्रयास कर रही है। महबूबा ने पुलगाम में लोगों के साथ चर्चा तो की ही, दुआ के लिये भी उनके हाथ उठे। कश्मीर में जारी अशांति के 57 दिन बाद आज मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों की गोलाबारी में मारे गए व्यक्ति के परिजनों से मिलीं। उन्होंने कहा कि सभी को राज्य में शांति बहाली के लिए प्रयास करने चाहिए। फेसबुक पोस्ट में महबूबा ने लिखा कि मारे गए मसहूक अहमद के परिवार से मुलाकात की। इस बीच कश्मीर में शनिवार को फिर से हिंसा भड़क उठी। जहां एक तरफ र्शीनगर में मीडिया कर्मियों पर सुरक्षाबलों द्वारा पिटाई करने का आरोप है वहीं ताजा हिंसा में 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। अनंतनाग के रैनपोरा इलाके में सैंकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। युवाओं द्वारा सुरक्षाबलों पर पथराव भी किया गया। स्थिति को काबू में करने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में 200 लोग घायल हो गए हैं जिनमें से चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। र्शीनगर में मीडियाकर्मियों ने भी सुरक्षाबलों द्वारा उनकी पिटाई करने का आरोप लगाया है।
लाल चौक पर कफ्यू जारी
लाल चौक और एयरपोर्ट रोड पर कब्जे के अलगाववादियों के आह्वान को देखते हुए र्शीनगर के कई इलाकों में आज भी कफ्यरू जारी रहा जबकि बाकी कश्मीर में कफ्यरू जैसी पाबंदियां लागू रहीं। वहीं 57 दिनों से जनजीवन पंगु बना हुआ है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि र्शीनगर के मुख्य इलाके के पांच थाना क्षेत्रों और शहर के बाहरी इलाके बटमालू तथा मैसूमा में कफ्यरू जारी रहा। उन्होंने कहा कि गर्मियों की राजधानी के इन इलाकों में एहतियाती उपाय के तौर पर कफ्यरू जारी रहेगा। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के घाटी दौरे के विरोध में अलगाववादियों ने लोगों से आज और रविवार को एयरपोर्ट रोड, शहर के मध्य में स्थित लाल चौक और जिला मुख्यालय पर कब्जा करने का आह्वान किया है जिसके मद्देनजर कफ्यरू लगाया गया है।
खास बातें
-दो महीने के बाद भी घाटी में हालात तनाव पूर्ण बने हुए हैं
-हालातों को देखते हुए घाटी के 300 सैन्य पोस्टों की सुरक्षा चाक-चौबंद की गई
-लाल चौक और एयरपोर्ट पर कब्जे के आह्वान को रोका कफ्यरू लगा कर
-गोलाबारी में मरे लोगों के परिजनों से मिलीं
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