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करुणानिधि के जीवन से जुड़े थे ये 5 बड़े विवाद, आज तक नहीं सुलझे

तमिलनाडु की राजनीति में एक नया आयाम रचने वाले एम करुणानिधि मंगलवार की शाम इस दुनिया को अलविदा कह गए। करुणानिधी की जिंदगी कई विवादों से घिरी रही और उनके जीवन का संघर्षों से भी गहरा नाता रहा।

करुणानिधि के जीवन से जुड़े थे ये 5 बड़े विवाद, आज तक नहीं सुलझे
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तमिलनाडु की राजनीति में एक नया आयाम रचने वाले एम करुणानिधि मंगलवार की शाम इस दुनिया को अलविदा कह गए। डीएमके प्रमुख करुणानिधी ने चेन्नई के कावेरी अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनके निधन के बाद आज पूरे देश में शोक की लहर है। तमिलनाडू के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि का जन्म साधारण परिवार में हुआ था।

आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से वह केवल आठवीं तक की पढ़ाई ही कर पाए। अपने 60 साल के राजनितिक सफर में करुणानिधि पांच बार मुख्यमंत्री बने। लेकिन करुणानिधी की जिंदगी कई विवादों से घिरी रही और उनके जीवन का संघर्षों से भी गहरा नाता रहा। उनके जीवन से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातें आज हम आपको बता रहे हैं...

1) करुणानिधि-जयललिता का विवाद

जयललिता और करुणानिधि के बीच तमिलनाडू में राजनीतिक प्रतिद्वंदिता काफी गहरी थी। 1989 में तमिलनाडु की विधानसभा में जयललिता के अपमान की घटना ने राज्य की सियासत में निजी रिश्तों में कड़वाहट को बड़ाने का काम किया। क्योंकि उस वक्त करुणानिधि तमिलनाडू के मुख्यमंत्री थे।

इसके बाद जब जयललिता मुख्यमंत्री बनीं तो इसका बदला लेने के लिए उन्होंने एक मामले में करुणानिधि को आधी रात में नींद से उठाकर जेल में डलवा दिया था। यह तस्वीर पूरे देश ने देखी कि किस कदर करुणानिधि अस्त-व्यस्त कपड़ो में पुलिस के सामने चीख पुकार कर रहे थे।

यह भी पढ़ेंः-राजाजी हॉल पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी, मरीना बीच पर होगा करुणानिधि का अंतिम संस्कार

2) सरकार हुई बर्खास्त

दरअसल एलटीटीई के साथ संबंधो को लेकर सवाल खड़े होते रहे। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का कहना था कि इसी कारणों से ही साल 1991 में उन्होंने करुणानिधि सरकार को बर्खास्त किया था। कभी चंद्रशेखर सरकार में मंत्री रहे सुब्रमण्यम स्वामी ने करुणानिधि को याद करते हुए कहा कि वे अपनी शर्तों पर राजनीति करने वाले नेता थे। उन पर भ्रष्टाचार और वंशवाद के आरोप लगते रहे लेकिन इन आरोपों के बीच अपनी पारी खेलकर वो पवेलियन लौट गए। बस शतक से छह कदम दूर रह गए।

3) लोगों ने कहा मौकापरस्त

करुणानिधि राजनीतिक में एक बड़ा नाम बन गए थे। उनके नाम की धमक राज्य से लेकर केंद्र के सियासी गलियारों कर धूम मचा रही थी। इसी के बल पर उन्होंने कभी कांग्रेस को तो कभी भाजपा को अपना साथ देकर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि इसके लिए उन्हें कटु आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा। यहां तक कि कुछ लोगों ने उन्हें मौकापरस्त नेता तक कह दिया।

4) दोस्त ने बना ली दूरी

आपको बता दें कि तमिल फिल्मों के सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन कभी करुणानिधि के दोस्त हुआ करते थे और उन्हें अपना नेता भी मानते थे। इसके कुछ समय बाद एमजी रामचंद्रन ने अपने मित्र पर भ्रष्टाचार और वंशवाद का आरोप लगाते हुए उनसे दूरी भी बना ली।

जिसके बाद तमिलनाडु की राजनीति में सियासी बदलाव आ गए। दरअसल एमजी रामचंद्रन ने डीएमके से अलग होकर एआईएडीएमके बना ली और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी बने।

5) जिद के चलते प्रेमिका से नहीं की शादी

बात 1944 की है जब करुणानिधि 20 साल के थे। तो अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहते थे लेकिन उनकी प्रेमिका के घरवाले पूरे रिवाज को साथ परंपरागत तरीके से उन दोनों की शादी करवाना चाहते थे. लेकिन करुणानिधि इसे पाखंड मानते थे और अपनी शर्तों पर अड़े रहे। मसलन ये हुआ कि उनकी दिलरुबा रूठी और रिश्ता टूट गया।

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