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कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी: कांग्रेस का स्यापा आश्चर्यजनक, पी चिदंबरम परेशान

सीबीआई के पास कानून सम्मत सबूत होगा, तभी सीबीआई ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार किया है।

कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी: कांग्रेस का स्यापा आश्चर्यजनक, पी चिदंबरम परेशान
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की गिरफ्तारी को राजनीतिक रंग देना समझ से परे है। सीबीआई के पास कानून सम्मत सबूत होगा, तभी उसने कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार है। लेकिन इस गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस जिस तरह राजनीतिक बांग भर रही है, वह आश्चर्यजनक है। एक तरफ तो कांग्रेस कहती रही है कि वह देश के कानून का सम्मान करती है, देश की संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करती है, दूसरी तरफ जब उसी कानून के पालन के लिए संवैधानिक संस्था कोई गिरफ्तारी करती है, तो उसे राजनीति से प्रेरित बताने लगती है।

अगर यह गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है, तो फिर कांग्रेस शासन काल में अनेक गिरफ्तारियां हुई हैं, उसके बारे में कांग्रेस क्या कहेगी। सबसे अधिक समय तक देश में शासन करने के चलते कांग्रेस को कानून और संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा होना चाहिए और उसे सबसे अधिक सम्मान करना चाहिए। कार्ति पर जिस तरह के आरोप लगे हैं, कांग्रेस को इसकी निंदा करनी चाहिए। कांग्रेस के लिए यह शर्मिंदगी जैसी बात है कि उसके एक वरिष्ठ नेता के बेटे विदेशी निवेश की मंजूरी जैसे गंभीर मसले में आरोपित हैं। वह मनी लांड्रिंग मामजे में भी आरोपित हैं।

पहले कांग्रेस को आरोप की गंभीरता देखनी चाहिए। कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने एयरसेल-मैक्सिस और आईएनएक्स मीडिया के लिए गलत तरीके से विदेश निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी प्राप्त की। दोनों मामले 2007 के हैं। उस वक्त पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे। पिता के वित्त मंत्री के वक्त अगर बेटे कार्ति का काम आसान होगा तो सवाल तो उठेंगे ही। क्या उस वक्त कांग्रेस ने कार्ति के काम आसान होने को लेकर अपने वित्त मंत्री से पूछा? इस मामले में सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया, इसके डायरेक्टरों पीटर और इंद्राणी मुखर्जी के साथ कार्ति चिदंबरम को आरोपित बनाया है।

सीबीआई लंबे समय से इस मामले की जांच कर रही थी। सीबीआई के एफआईआर में कार्ति चिदंबरम पर एफआईपीबी की शर्तों के उल्लंघन की जांच को प्रभावित करने के लिए पैसे लेकर अपने प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप है। जांच में पुख्ता सबूत के बाद ही सीबीआई ने एन्फोर्समेंट केस इन्फर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर), दर्ज की जो ईडी के समतुल्य एक पुलिस एफआईआर है। ईसीआईआर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज की गई थी। दरअसल, कार्ति चिदंबरम का नाम आईएनएक्स मीडिया केस के अलावा एयरसेल-मैक्सिस केस से भी जुड़ा है।

मार्च 2006 में मलेशिया की कंपनी मैक्सिस कम्यूनिकेशन ने एयरसेल में 74% हिस्सेदारी खरीदी थी। मई 2017 में प्रवर्तन निदेशालय ने कार्ति चिदंबरम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया और 25 सितंबर 2017 को कार्ति से जुड़ी 90 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति, बैंक अकाउंट और एफडी को अटैच कर लिए। दो गंभीर मामले में आरोपित होने के बावजूद कार्ति मामले को कांग्रेस राजनीतिक दुश्मनी कह कर भाजपा नीत सरकार पर आरोप मढ़ने की फिराक में है। कांग्रेस की यह कोशिश उसकी राजनीति पर भारी पड़ सकती है। भ्रष्टाचार में आंकठ डूबे होने के आरोप के चलते ही 2014 में उसे सत्ता से हाथ धोन पड़ा था। इसके बावजूद वह भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखरता से खड़ी नहीं हो पा रही है।

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