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करतारपुर कॉरिडोर\ एक क्लिक में देखें कैसा दिखेगा कॉरिडोर

करतारपुर साहिब सिक्खों के प्रथम धर्मगुरू गुरूनानक देव के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि यहीं पर उन्होंने अपना सबसे ज्यादा समय बिताया और अंत में करतारपुर में ही उन्होंने अपनी अंतिम सांसे लीं।

करतारपुर कॉरिडोर\ एक क्लिक में देखें कैसा दिखेगा कॉरिडोर
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करतारपुर साहिब सिक्खों के प्रथम धर्मगुरू गुरूनानक देव के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि यहीं पर उन्होंने अपना सबसे ज्यादा समय बिताया और अंत में करतारपुर में ही उन्होंने अपनी अंतिम सांसे लीं। करतारपुर साहिब गुरूद्वारा नरोवाल जिले की शंकरगढ़ तहसील में कोटी पिंड में रावी नदी के करीब स्थित है। 1920-29 के बीच में महाराजा पटियाला ने इस गुरुद्वारे को बनवाया था। तब इसे बनवाने में 1 लाख 35 हजार 600 रुपये का खर्च आया था। 1995 में रावी नदी में आई बाढ़ के कारण इसका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसे बाद में पाकिस्तान की सरकार ने बनवाया था। भारत में रहने वाले सिख सिर्फ 3 किलोमीटर दूस स्थित इस गुरुद्वारे को दूबीन से देखते हैं। भारत में डेरा बाबा नानक से लेकर गुरुद्वारा दरबार सिंह करतारपुर साहिब तक बनने वाले कॉरिडोर का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। गुरूनानक देव के 550 वें प्रकाश पर्व के मौके पर खास डाक टिकट और सिक्के जारी किए जाएंगे। दुनियाभर के भारतीय दूतावासों में विशेष कार्यक्रम करवाए जाएंगे। पाकिस्तान करतारपुर बॉर्डर भारतीय श्रद्धालुओं के लिए खोलेगा। गुरुद्वारे तक आने जाने के लिए वीजा नहीं लेना पड़ेगा। सिर्फ अपने पास पासपोर्ट रखना पड़ेगा। गुरुद्वारे तक जाने के लिए श्रद्धालुओं को टिकट लेना पड़ेगा। दोनों देशों के बीच करतारपुर कॉरीडोर की पहल सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी।

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