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''जल्लीकट्टू'' के बाद अब कर्नाटक में ''कम्बाला'' को लेकर प्रदर्शन

इस मामले में 30 जनवरी को हाईकोर्ट अपना आदेश सुनाएगा।

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बेंगलुरु. 'जल्लीकट्टू' के बाद अब 'कम्बाला' पारंपरिक खेल को लेकर भी कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में प्रदर्शन किया जा रहा है। जल्लीकट्टू को कानूनी रूप देने के बाद कर्नाटक में प्रदर्शनकारी यह मांग कर रहे हैं कि कम्बाला को भी इसी तरह से कानूनी रूप दिया जाए और उसे आयोजित करने की इजाजत दी जाए। इस मामले में 30 जनवरी को हाई कोर्ट अपना आदेश सुनाएगा।
आपको बता दें कि जैसे जल्लीकट्टू सांड का खेल है वैसे ही कम्बाला भैंसों की पारंपरिक दौड़ आयोजन है। हर साल कर्नाटक के तटीय जिलों में कीचड़ भरे खेतों में आयोजित की जाती है।
महाराष्ट्र में भी इस खेल पर प्रतिबंध हटाने की मांग शुरु हो गई है। महाराष्ट्र के पशुधन कल्याण मंत्री महादेव जांकर ने कहा कि बैन सही नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार के हाथ बंधे हुए हैं और कोर्ट के आदेश का पालन करना उनका कर्तव्य है।
जलीकट्टू आंदोलन से प्रेरित होकर मंगलुरु की कम्बाला समितियों ने मीटिंग कर यह तय किया है कि 28 जनवरी को दक्षिण कन्नड़ जिले के मूडबिडरी में विशाल प्रदर्शन किया जाएगा जिसमें 200 जोड़ी भैसों को भी शामिल किया जा सकता है। यही नहीं कम्बाला के आयोजकों ने यह निर्णय लिया है कि मंगलुरु में भी अगले हफ्ते एक विशाल प्रदर्शन कर कम्बाला पर लगी रोक को हटाने की मांग की जाएगी।
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, पशु अधिकार समूह पेटा ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद जल्लीकट्टू की तरह, पिछले साल कम्बाला पर प्रतिबंध लगाया गया था। चीफ जस्टिस एस.के. मुखर्जी की अध्यक्षता वाली कर्नाटक हाई कोर्ट की एक डिविजन बेंच ने नवंबर 2016 के अपने अंतरिम आदेश में कम्बाला के आयोजन पर रोक लगा दी थी।
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