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गायब विधायकों की लगी हाजरी, Vidhana Soudha में किया लंच- सरकार बनाने से एक कदम दूर

कर्नाटक में चल रहे हाई वोल्टेज नाटक के बाद कांग्रेस के दो गायब विधायक में आनंद सिंह और प्रताप गौड़ा पाटिल ने डीके सुरेश और दिनेश गुंडू राव के साथ कर्नाटक विधानसभा की कैंटीन में लंच किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज चार बजे बीएस येदियुरप्पा की भाजपा सरकार को Vidhana Soudha में शक्ति परीक्षण का सामना करना है।

गायब विधायकों की लगी हाजरी, Vidhana Soudha में किया लंच- सरकार बनाने से एक कदम दूर
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कर्नाटक में चल रहे हाई वोल्टेज नाटक के बाद कांग्रेस के दो गायब विधायक में से एक प्रताप गौड़ा पाटिल ने डीके सुरेश और दिनेश गुंडू राव के साथ कर्नाटक विधानसभा की कैंटीन में लंच किया, जबकि आनंद सिंह अभी तक गायब हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज चार बजे बीएस येदियुरप्पा की भाजपा सरकार को Vidhana Soudha में शक्ति परीक्षण का सामना करना है।

गौरतलब है कि राज्य में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। कर्नाटक विधानसभा की 224 सदस्यीय विधानसभा में से 222 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा को 104, कांग्रेस को 78 और जनता दल सेक्युलर को 38 सीटें मिली हैं। फिलहाल, बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 111 है क्योंकि कुमारस्वामी दो सीटों से चुनाव जीते हैं। कांग्रेस जद (से) ने परिणाम आने के बाद गठबंधन बनाया और सरकार बनाने का दावा पेश किया था।

कर्नाटक विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष के तौर पर के जी बोपैया की नियुक्ति के खिलाफ कांग्रेस - जद (से) की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की शक्ति परीक्षण टालने की चेतावनी के बाद यह गठबंधन बैकफुट पर आ गया। बौपेया की नियुक्ति को लेकर इस (जद (से)- कांग्रेस) गठबंधन ने उंगली उठाई थी। गठबंधन ने बोपैया द्वारा पहले निभाई गई विवादित भूमिका का हवाला देते हुए अपनी दलीलें रखनी शुरू की थीं।

बोपैया 2009-2013 के बीच राज्य विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं और उन्होंने 2010 में शक्ति परीक्षण के दौरान बी एस येदियुरप्पा की जीत सुनिश्चित करने के लिए 16 विधायकों को अयोग्य करार दिया था। हालांकि जब न्यायाधीश ए के सीकरी के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि जब अस्थायी अध्यक्ष की प्रमाणिकता पर ऊंगली उठाई जा रही है तो न्यायालय को बोपैया को भी सुनना पड़ेगा और इ ससे शक्ति परीक्षण टल जाएगा।

पीठ ने कहा कि आप चाहते हैं कि हम अस्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति की उपयुक्तता पर आदेश दें तो हम आपको सुनने के लिए तैयार हैं और इसके लिए हमें अस्थायी अध्यक्ष को नोटिस जारी करना होगा और हमें शक्ति परीक्षण को टालना होगा। सिब्बल 2011 के कर्नाटक शक्ति परीक्षण के उच्चतम न्यायालय के आदेश को पढ़ रहे थे।

लेकिन उन्होंने पीठ को तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैं अस्थाई अध्यक्ष पर उंगली नहीं उठा रहा हूं। मैं सिर्फ न्यायालय से यह कह रहा हूं कि उन्हें शक्ति परीक्षण कराने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष बोपैया के 16 विधायकों को अयोग्य करार देने के फैसले को उच्चतम न्यायालय ने 2011 में निरस्त कर दिया था।

येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को बचाने के लिए विधायकों को अयोग्य करार दिया गया था। पीठ की इस मामले में बोपैया को सुनने की टिप्पणी के बाद कांग्रेस और जद (से) ने अपनी रणनीति बदल ली और अस्थाई अध्यक्ष के खिलाफ अपनी अंतरिम याचिका पर जोर नहीं दिया।

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