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कर्नाटक: बी.एस येदियुरप्पा कभी मील में करते थे क्लर्क की नौकरी, जानिए कैसे तय किया मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

27 फरवरी 1943 को येदियुरप्पा का जन्म मांडच्या क्षेत्र के बुकानाकेरे में लिंगायत परिवार में हुआ था। वहीं 1965 में समाजिक कल्याण विभाग में क्लर्क के रुप में येदियुरप्पा नौकरी छोड़कर शिकारीपुरा चले गए।

कर्नाटक: बी.एस  येदियुरप्पा कभी मील में करते थे क्लर्क की नौकरी, जानिए कैसे तय किया मुख्यमंत्री बनने तक का सफर
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कर्नाटक चुनाव को लेकर देश की सियासत में घमासान मचा हुआ था, वहीं इस चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था और भाजपा ने भी यहां जीत हासिल की है।

इसके साथ ही कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने नतीजे आने से पहले ही दावा किया था कि कर्नाटक में भाजपा की सरकार आने वाली है, वहीं येदियुरप्पा ने आज मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली है।

वहीं चावल मिल क्लर्क और एक किसान नेता से बढ़कर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने है और आज हम आपको बताएंगे कैसे एक क्लर्क बना कर्नाटक का मुख्यमंत्री।

27 फरवरी 1943 को येदियुरप्पा का जन्म मांडच्या क्षेत्र के बुकानाकेरे में लिंगायत परिवार में हुआ था। वहीं 1965 में समाजिक कल्याण विभाग में क्लर्क के रुप में येदियुरप्पा नौकरी छोड़कर शिकारीपुरा चले गए।
फिर उन्होंने वीरभद्र शास्त्री की शंकर चावल मिल में एक क्लर्क की नौकरी की थी, वहीं 1970 में येदियुरप्पा ने सार्वजनिक सेवाएं देना शुरु कर दिया था। वहीं 1972 में शिकारीपुर जनसंघ के अध्यक्ष में चुना गया था।
येदियुरप्पा ने 1977 में जनता पार्टी के सचिव बनने के बाद से ही राजनीति की दुनिया में पूर्ण रूप से आ गए थे, 1983 में वह पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। वहीं कॉलेज के दिनों में येदियुरप्पा कॉलेज के दिनों में आरएसएस का भी हिस्सा रह चुके है।
2007 में कर्नाटक की राजनीति में जबरदस्त उलटफेर हुआ था, जिसके बाद पूरे राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया था। जिसके बाद भाजपा और जेडीएस ने अपने मतभेद को खत्म किया और साथ मिलकर सरकार बनाई। वहीं यह सब येदियुरप्पा के लिए सही साबित हुआ और 12 नवंबर 2007 को वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन गए थे।
भाजपा में येदियुरप्पा एक एेसे नेता है, जिसकी बदौलत दक्षिण भारत में ना सिर्फ जीत हासिल की और सत्ता पर शासन भी किया है। गौरतलब है कि ज्यादा दिन तक येदियुरप्पा इस कुर्सी पर नहीं बने रहे है और जेडिएस से मंत्रालयों को लेकर हुए विवाद के बाद 19 नवंबर को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

लेकिन फिर से साल 2008 में भाजपा ने कर्नाटक में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की और एक बार और येदियुरप्पा सीएम बने। मगर तीन साल बाद उनका नाम काफी सारे विवादों में घिरा नजर आने लगा था, उन पर कथित तौर पर भूमि घोटाले से लेकर खनन घोटाले में शामिल थे।
लोकायुक्त की रिपोर्ट आने के बाद ही येदियुरप्पा को सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। इन घटनाओं के बाद ही येदियुरप्पा ने अपना नाम भाजपा से हटा लिया था।
बता दें कि भाजपा को कर्नाटक के चुनाव में लिंगायत फैक्टर काफी महत्वपूर्ण है, वहीं भाजपा को यह समझने के लिए देर नहीं लगी कि येदियुरप्पा के बिना इस राज्य में जीतना आसान नहीं है।
2018 में इस वजह को देखते हुए भाजपा ने येदियुरप्पा को अपना मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाया और भाजपा का यह दाव काफी हद तक सही साबित हुआ। इसके साथ ही कर्नाटक में भाजपा ने अपनी सरकार बनाई और येदियुरप्पा इस राज्य के मुख्यमंत्री बने।

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