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कुमारस्वामी की शपथ में दिखी थर्ड फ्रंट की झलक, बिना दूल्हे के एकजुट हुआ विपक्ष

अभिनेता से नेता बने कुमारस्वामी ने आज कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके इस शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी दलों के बड़े नेताओं से लेकर, विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया था।

कुमारस्वामी की शपथ में दिखी थर्ड फ्रंट की झलक, बिना दूल्हे के एकजुट हुआ विपक्ष
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अभिनेता से नेता बने कुमारस्वामी ने आज कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके इस शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी दलों के बड़े नेताओं से लेकर, विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया था।

विपक्ष के सभी कद्दावर नेताओं ने इस मौके पर विपक्षी एकजुटता का प्रर्दशन किया। इस पूरे आयोजन में सपा,बसपा,राजद,कांग्रेस,टीएमसी,जेडीएस,आप समेत ज्यादातर दलों के विपक्षी नेता शामिल हुए।

इस समारोह में खास बात यह रही की कभी एक दूसरे के कट्टर विरोधी रहे मायावती, अखिलेश, राहुल गांधी,सोनिया गांधी,ममता बनर्जी,अजित सिंह, शरद पवार चंद्रबाबू नायडू,सीताराम येचुरी जैसे नेता अपनी-अपनी विचारधारा और राजनैतिक दुश्मनी को ताक पर रखकर एक दूसरे के साथ-साथ खड़े रहे।

सभी राजनेताओं ने एक साथ मंच साझा किया। इस पूरे समारोह को विपक्षी एकता के समारोह के रूप में पेश किया गया। जिस से देश के सभी गैरभाजपाई दलों में एकता का संदेश जाए।

खास बात यह रही कि इस पूरे कार्यक्रम में भाजपा का एक नेता नेता भी नही था। इस पूरे आयोजन का मकसद 2019 में किसी भी तरीके से मोदी को रोकना है।

2019 के लोकसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में मोदी को रोकने के लिए सभी विपक्षी दलों का साथ आना जरुरी है क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल अपने दम पर इस समय भाजपा को रोकने की हालत में नही है।

इस पूरे समारोह में जो विपक्षी एकता दिखी वो कहीं ना कहीं 2019 लोकसभा चुनाव में थर्ड फ्रंट की शुरुआत है। विपक्षी एकता के सामने एक सवाल यह भी है कि अगर विपक्ष लोकसभा चुनाव में एक होता भी है तो उसका नेतृत्व कौन करेंगा?

क्योंकि कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है उसकी तरफ से तो राहुल ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे पर क्या बाकी दल इस बात से सहमत होंगे ये बड़ा सवाल है क्योंकि ममता बनर्जी भी राष्ट्रीय राजनीति में खुद को स्थापित करना चाहती है।

मोदी सरकार का हर मुद्दे पर विरोध करके, मोदी सरकार से सीधे तौर पर टक्कर लेकर खुद को मोदी के सामने सबसे बड़ा नेता दिखाती है । ममता, राहुल गांधी पर अपनी सहमति जताएगी इसकी उम्मीद कम ही नजर आती है।

पर शपथ ग्रहण समारोह में जिस प्रकार से विपक्षी दल अपने सारे मतभेद भुलाकर एकजुट हुए इससे कहीं ना कहीं थर्ड फ्रंट की उम्मीद तो बनती ही है।

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