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कर्नाटक चुनाव: तटीय क्षेत्र में मोदी की रैली का कांग्रेस की रणनीति पर पड़ सकता है असर

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में पांच मई को होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली का कांग्रेस की चुनाव रणनीति पर असर देखने को मिल सकता है।

कर्नाटक चुनाव: तटीय क्षेत्र में मोदी की रैली का कांग्रेस की रणनीति पर पड़ सकता है असर
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कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में पांच मई को होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली का कांग्रेस की चुनाव रणनीति पर असर देखने को मिल सकता है।

राज्य के इस तटीय जिले पर कब्जा कायम रखने के लिए कांग्रेस पूरी ताकत झोंकने जा रही है, लेकिन इसके उम्मीदवारों का मानना है कि मोदी की आगामी रैली मतदाताओं का रूझान भाजपा की ओर कर सकती है और इसलिए पार्टी को अपनी रणनीति पर फिर से काम करने की जरूरत है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस रैली को बेअसर करने के लिए पार्टी टिकट बंटवारे से नाराज अपने असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने के तरीके तलाशेगी। उन्होंने बताया कि आखिरी कुछ दिनों में प्रचार अभियान में तेजी लाने की कोशिश की जाएगी।

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घर- घर जाकर प्रचार किया जाएगा और मतदान केंद्र स्तर पर समर्थन लामबंद किया जाएगा। मंगलौर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार एवं राज्य के मौजूदा खाद्य मंत्री यू टी खादर ने न्यूज एजेंसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पिछले चुनावों के दौरान मोदी की रैली का ज्यादा असर नहीं पड़ा था।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अब, वह प्रधानमंत्री के तौर पर दौरा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि किसी ना किसी रूप में इसका प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मोदी की रैली कुछ हद तक मतदाताओं को प्रभावित करेगी लेकिन उतना नहीं, जितना की भाजपा उम्मीद कर रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रभाव में पांच प्रतिशत उतार- चढ़ाव देखने को मिल सकता है। चौथी बार चुनाव लड़ रहे खादर ने दावा किया कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में साम्प्रदायिक झड़पों पर रोक लगायी है।

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हालांकि, उन्होंने चुनाव का ध्रुवीकरण करने और हिंदुत्व कार्ड खेलने को लेकर भाजपा पर प्रहार किया। भारी मतों के अंतर से जीत हासिल करने को लेकर आश्वस्त खादर ने कहा कि मेरे क्षेत्र में सत्ता विरोधी कोई लहर नहीं है।

यदि कोई मौजूदा विधायक हारता है तो यह व्यक्तिगत समस्याओं के चलते होगा, ना कि पार्टी की समस्या के चलते। साल 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर जिले में प्रचार किया था लेकिन भाजपा एक सीट से ज्यादा हासिल नहीं कर सकी।

जबकि कांग्रेस ने सात सीटें जीती थी। गौरतलब है कि बंतवाल, मंगलौर और मंगलौर उत्तर सीटों को साम्प्रदायिक तनावों को लेकर जाना जाता है। मंगलौर उत्तर सीट पर तीसरी बार चुनाव लड़ रहे कांग्रेस उम्मीदवार मोहीउद्दीन बावा ने कहा कि मोदी लहर है, मैं मानता हूं।

लेकिन मैं जीत के प्रति आश्वस्त हूं। सिर्फ 20 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी वाले इस निर्वाचन क्षेत्र से यदि एक मुसलमान फिर से चुना जाता है तो यह एक बड़ी जीत होगी। हालांकि, पार्टी के दक्षिण कन्नड़ जिला प्रभारी एवं पूर्व मंत्री रामनाथ पाई ने कहा कि कोई मोदी लहर नहीं है।

जिस तरह से वह बोलते हैं वह किसी पंचायत प्रधान से भी निम्न स्तर का होता है। पाई बंतवाल से आठवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तटीय जिले में भाजपा और कांग्रेस के बीच करीबी मुकाबला देखने को मिलेगा।

इनपुट भाषा

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