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''पाकिस्तानियों ने मुझे पकड़ा, टॉर्चर किया और फिर मुझे वापस घर भेज दिया''

भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान आज वापस भारत लौट रहे हैं। 27 फरवरी को वह एक पाकिस्तानी विमान का पीछा करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गिर गए थे। जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में ले लिया था।

भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान (Abhinandan Varthaman) आज वापस भारत लौट रहे हैं। 27 फरवरी को वह एक पाकिस्तानी विमान का पीछा करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में गिर गए थे। जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में ले लिया था।
बृहस्पतिवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने यह घोषणा की कि विंग कमांडर अभिनंदन को वापस भारत भेज दिया जाएगा। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब कोई भारतीय पायलट और पाकिस्तानी सेना के द्वारा हिरासत में लिया गया हो।
1999 के कारगिल युद्ध में एयरफोर्स पायलट कंबमपति नचिकेता (Kambampati Nachiketa) भी पाकिस्तान की हिरासत में चले गए थे। आइए जानते हैं कंबमपति नचिकेता (Kambampati Nachiketa) के पकड़े जाने की कहानी। और उन्होंने अभिनंनदन की वापसी को लेकर क्या कहा।

ऐसे पकड़े गए नचिकेता

फाइटर पायलट नचिकेता कारगिल युद्ध के समय 26 साल के थे। उन्हें 17 हजार फीट से ज्याद की ऊंचाई पर तैनात पाकिस्तानी चौकियों को तबाह करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके लिए उन्होंने मिग-27 विमान से उड़ान भरी और अपने लक्ष्य पर निशाना साधा।
तभी उनके विमान से आकर एक रॉकेट टकरा गया। और उनके इंजन में आग लग गई। नचिकेता विमान से कूदे लेकिन बहुत कम ऊंचाई पर होने के चलते उनकी कमर में चोट आई और वह घायल हो गए। गिरते वक्त उन्होंने अपनी पिस्टल से पाकिस्तानी सैनिकों पर गोली चलाई।
पाकिस्तानियों ने भी उन पर गोली चलाई लेकिन कोई भी गोली उन्हें नहीं लगी। कुछ ही समय बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने उन्हें घेर लिया। उन्हें पकड़ते ही पाकिस्तानी उनके साथ मारपीट करने लगे। तभी वहां पाकिस्तानी एयरफोर्स का एक अफसर पहुंचा जिसका नाम कैसर तुफैल था।
कैसर कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ऑपरेशंस का निदेशक था। कैसर नचिकेता को अपने साथ एक कमरे में ले गए। नचिकेता के मुताबिक कैसर का व्यवहार काफी दोस्ताना था। उसने नचिकेता से उनके परिवार और सर्विस से जुड़ी जानकारी पूछी।
बाद में कैसर ने कहा कि नचिकेता और उनके जीवन में काफी समानताएं हैं जिससे वह उनसे प्रभावित हुए। वहां से नचिकेता को बटालिक सेक्टर के किसी जगह पर ले जाया गया। बाद में एक हेलीकॉप्टर से स्कर्दू ले जाया गया। वहां लगातार उन्हें टॉर्चर किया गया। नचिकेता ने कहा कि उन्हें हर वक्त अपने सामने मौत नजर आती थी। लेकिन भारत वापस लौटने की उम्मीद उनमें थी।

आठ दिन बाद लौटे नचिकेता

भारत सरकार के प्रयासों के चलते आठ दिनों बाद उन्हें रेड क्रॉस को सौंप दिया गया। बाद में रेड क्रॉस के जरिए वह वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत पहुंचे। पहले वाघा और बाद में दिल्ली पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ।
उनके माता-पिता ने एयरपोर्ट पर पहुंच कर उनका स्वागत किया। कमर में चोट के चलते नचिकेता अपने पसंदीदा फाइटर प्लेन को फिर नहीं उड़ा सके। मजबूरी में उन्हें हमेशा ट्रांसपोर्ट विमान उड़ाना पड़ा। 2017 में वह ग्रुप कैप्टन के रूप में रिटायर हुए।

'अभिनंदन' पर क्या बोले 'नचिकेता'

अभिनंदन दो दिनों से एक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। मैं खुश हूं कि वह वापस आ रहे हैं और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए फिर से आसमान में उड़ेंगे। अभिनंदन एक बहादुर पायलट हैं, जो वायु सैनिक के तौर पर काफी पेशेवर अंदाज रखते हैं, हमें उन पर गर्व है। उन्होंने वही किया जो कोई भी अपनी ड्यूटी निभाते वक्त करता। उन्हें काफी मुश्किल हालात में बंदी बनाए गए, जब वह अपनी ड्यूटी कर रहे थे।
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