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इससे पहले भी CJI से भिड़ चुके हैं जस्टिस चेलमेश्वर, मतभेदों का रह चुका है लंबा इतिहास

सुप्रीम कोर्ट के वकील अतुल कुमार ने बताया कि जस्टिस चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट में अपने विचारों और फैसलों को लेकर काफी बेबाक हैं।

इससे पहले भी CJI से भिड़ चुके हैं जस्टिस चेलमेश्वर, मतभेदों का रह चुका है लंबा इतिहास

सुप्रीम कोर्ट के 4 सिटिंग जज मीडिया के सामने आए। ऐसा देश के इतिहास में पहली बार हुआ। जस्टिस चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठ जज हैं और इन्होंने ही मीडिया के सामने आए 4 जजों की अगुवाई की थी। उन्होंने अपनी वकालत के करियर में सबसे बड़ी मतभेद को एकदम अगल तरीके से सबके सामने रखा।

जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकूर और जस्टिस कुरियन जोसेफ के साथ मिलकर मीडिया के सामने आए। चेलमेश्वर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन में कई अनियमितताएं हैं और वो नहीं चाहते कि 20 साल बाद उनके ऊपर कोई आरोप लगे। इसके साथ ही जजों की बातों को न समझने के आरोप चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर लगाए।
जस्टिस चेलमेश्वर सहित चार जजों ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट में नियमों का पालन नहीं किया गया जिसका देश और सुप्रीम कोर्ट पर खुद दूरगामी प्रभाव हो सकता है। हालांकि यह पहला मामला नहीं है जब जस्टिस चेलमेश्वर ने अपना मतभेद जाहिर किया हो। इससे पहले भी वो कई मामलों में अपनी अलग राय बेबाकी से रख चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट के वकील अतुल कुमार ने बताया कि जस्टिस चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट में अपने विचारों और फैसलों को लेकर काफी बेबाक हैं। जब पीए संगमा ने प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के खिलाफ पीटिशन दाखिल की थी और उसे तत्कालीन चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली बेंच ने खारिज कर दिया था तब भी जस्टिस चेलमेश्वर उस फैसले के खिलाफ खड़े होने वाले जज थे।
गौरतलब है कि जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि कभी-कभी होता है कि देश के सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है। सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है जिससे देश का लोकतंत्र खतरे में पड़ गया है। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते की देश की न्यायपालिका की निष्ठा पर सवाल उठे।
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