Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

सामाजिक जनजागरण के जरिए हो बाल विवाह का उन्मूलन: न्यायमूर्ति सीकरी

एनसीपीसीआर और यंग लाइव्स द्वारा बाल विवाह पर तैयार की गई रिर्पोट का किया लोकार्पण।

सामाजिक जनजागरण के जरिए हो बाल विवाह का उन्मूलन: न्यायमूर्ति सीकरी
X

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए़ के़ सीकरी ने बाल विवाह को बच्चों के जीवन जीने के अधिकार का उल्लंधन बताते हुए कहा कि इसे भारत से खत्म करने के लिए 2012 में निर्भया गैंगरेप के समय समाज से उठे मूवमेंट की तर्ज इस कुरीति को भी खत्म करने के लिए एक व्यापक सामाजिक जनजागरण अभियान की जरूरत है।

यह बातें न्यायमूर्ति सीकरी ने यहां गुरूवार को ए स्टैटिकल अनेलिसिस ऑफ चाइल्ड मैरिज इन इंडिया- बेस्ड ऑन 2011 सेंसेस नामक रिर्पोट का लोकापर्ण करने के अवसर पर कही। रिर्पोट को बाल अधिकारों पर काम करने वाली देश की शीर्ष संस्था राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और यंग लाइव्स नामक गैर-सरकारी संगठन ने मिलकर तैयार किया है।

न्यायूर्ति सीकरी ने कहा कि जिस तरह से एक वयस्क को अपने हिसाब से जीवन जीने का अधिकार है। उसी तरह से एक बच्चे को भी अपनी मर्जी और पसंद से जीवन जीने का हक है। यह संविधान द्वारा दिया गया मूल अधिकार है। मैं यह भी चाहता हूं कि एनसीपीसीआर और यंग लाइव्स इस गंभीर सामाजिक समस्या पर नालसा के साथ मिलकर एक प्रोजेक्ट तैयार करें।

इस वक्त न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा नालसा के अध्यक्ष हैं। मैं उनसे इस कार्य में आयोग की मदद करने को कहूंगा। क्योंकि इसी से इस मामले में वैधानिक पक्ष उभरेगा। जिससे सुधार का रास्ता खुल सकता है।

तत्काल खत्म हो महानगरीय चुनौती

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि जनगणना के डेटा के हिसाब से 70 जिलों में बाल विवाह की समस्या ज्यादा है। लेकिन अब चुनौती महानगरीय शहरों में इसके पांव पसारने की है। इसपर तत्काल रोक लगानी होगी, वरना सारे प्रयास धरे के धरे रह जाएंगे। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में भी बाल विवाह की गूंज सुनाई पड़ने लगी है।

इसके पीछे पलायन व गरीबी कारण हो सकता है। मंत्रालय सबला, किशोरी स्वास्थ्य योजना के जरिए इस दिशा में काम कर रहा है। लेकिन इन 70 जिलों में सेमिनार किए जाएं, अलग से सूचित किया जाए जिससे जागरूकता शुरू हो। प्रभावी कानूनी तंत्र की भी जरूरत है। इसी से हम नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 में अच्छी स्थिति में आ सकेंगे।

आयोग और यंग लाइव्स की रिर्पोट नीति निर्माताओं के लिए मददगार होगी। मंत्रालय इसके क्रियान्वयन में सहयोग करेगा। एनसीपीसीआर की अध्यक्ष स्तुति कक्कड़ ने कहा कि देश में 12 मिलियन बच्चों की शादी कानूनी उम्र से पहले हो जाती है। इसमें 7 मिलियन लड़के और 5 मिलियन लड़कियां हैं। आयोग इस विषय को गंभीरता से उठा रहा है।

रिर्पोट का सार

यंग लाइव्स की कंट्री डायरेक्टर डॉ़ रेनू सिंह ने कहा कि 13 राज्यों के 70 जिलों में बाल विवाह गंभीर चुनौती है। यहां 21 फीसदी बाल विवाह होते हैं। इसमें हरियाणा का 1 जिला, मप्र के 9 जिले, राजस्थान के 13 जिले, महाराष्ट्र के 16, गुजरात के 6, बिहार के 6, अरूणाचल प्रदेश के 3, आंध्र प्रदेश के 2, झारखंड के 3, कर्नाटक के 2, यूपी के 9, वेस्ट बंगाल के 3 और झारखंड के 3 जिले शामिल हैं।

दक्षिण-एशिया में 20 से 49 वर्ष के बीच की आयुवर्ग की 56 फीसदी महिलाओं की शादी कानूनी उम्र यानि 18 साल से पहले हो जाती है। सेंसेस के हिसाब से 33.8 मिलियन बच्चों का बाल विवाह हुआ है। राज्यों में बाल विवाह के मामले में राजस्थान शीर्ष पर है। यहां के बांसवाड़ा और भीलवाड़ा में ज्यादा चुनौती बनी हुई है।

रिर्पोट कई कानूनों की मौजूदगी और उनके बीच एकरूपता की कमी, समस्या के पीछे छिपे कारण, कमियों, प्रभाव, सरकारी प्रयासों के अलावा आंकड़ों पर आधारित कुछ सिफारिशें करती हैं। इसमें बच्चों को मुफ्त माध्यिमक शिक्षा देना, तस्करी रोकना, लैंगिग समानता को बढ़ावा देना, शादी का अनिवार्य पंजीकरण कराना, जागरूकता अभियान, धार्मिक गुरूओं द्वारा समुदाय को जागरूक करना, बाल विवाह रोकने वाले स्थायी अधिकारी की नियुक्ति, अधिक बाल विवाह वाले जिले का आकलन करना शमिल है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story