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जानिए क्यों न्यायाधीश संजय कुमार ने कहा- मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त

दिल्ली की विशेष अदालत ने सबसे लंबे चलने वाले 37 साल पुराने एक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को फटकार लगाई है।

जानिए क्यों न्यायाधीश संजय कुमार ने कहा- मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त
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देश की अदालतों के समक्ष लंबित मामलों में से संभवत: सबसे लंबे चलने वाले 37 साल पुराने एक मामले का निपटारा न कर पाने के लिए शहर की एक विशेष अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को फटकार लगाई है। अदालत ने सीबीआई को इस मामले का निपटान सुनिश्चित करने के लिए मुस्तैदी नहीं दिखाने पर कहा कि 'मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त' वाली उक्ति इस संदर्भ में एकदम सटीक बैठती है।

सीबीआई ने मामले से जुड़े एक अभियोजक को अन्य की नियुक्ति किए बिना अदालत से स्थानांतरित कर दिया। सीबीआई के इस फैसले पर अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए एजेंसी को न सिर्फ फटकार लगाई बल्कि इस आपराधिक मामले में देरी करने पर अभियोजन के निदेशक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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यह टिप्पणी विशेष न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल द्वारा की गई जो वर्ष 1981 में इलाहाबाद के प्राचीन तक्षकेश्वर महादेव मंदिर से एक प्राचीन प्रतिमा चोरी होने और कथित रूप से तस्करी कर न्यू यॉर्क भेजे जाने के मामले की सुनवाई कर रहे थे। मामले की जिरह अंतिम चरण में है।

अदालत ने कहा कि मुद्दा यह नहीं है कि 37 साल पुराने मामले की सुनवाई चलने के दौरान किसी खास वरिष्ठ लोक अभियोजक को अदालत से स्थानांतरित क्यों किया गया। बल्कि सवाल यह है कि अभियोजन निदेशक द्वारा पहले ही सोच-विचार करने के प्रयास क्यों नहीं किए गए ताकि इस सबसे पुराने मामले और दूसरे पुराने मामले जिनकी सुनवाई चल रही है, उनके प्रभावी निपटान में इस अदालत को कोई असुविधा न हो।

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न्यायाधीश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक 10 साल से ज्यादा पुराने मामलों के निपटारे के लिए इसने खास तौर पर पूर्व अभियोजक बी.के.सिंह को खुद को तैयार करने के लिए कहा था लेकिन उन्हें छह महीने के भीतर स्थानांतरित कर दिया गया।

उन्हें उस समय स्थानांतरित किया गया जब उन्होंने मामले से जुड़े सारे तथ्यों का अध्ययन कर लिया था और उनके स्थानांतरण की कोई भी सूचना अदालत को नहीं दी गई। अदालत ने इस संबंध में जरूरी कदम उठाने के लिए अपना आदेश गृह सचिव और सीबीआई के निदेशक को भी भेजा है।

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