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जज ने हत्या के दोषी की लिखी कविता सुन मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे की हत्या के दोषी की लिखी कविताएं पढ़ने के बाद उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस एमआर शाह ने शनिवार को कहा, जेल में आरोपी के द्वारा लिखी गई कविताएं यह बताती हैं कि उसे कम उम्र में की गई अपनी गलती का अहसास हो गया है। अब उसने सुधार किया है।

जज ने हत्या के दोषी की लिखी कविता सुन मौत की सजा को उम्रकैद में बदला
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सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे की हत्या के दोषी की लिखी कविताएं पढ़ने के बाद उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस एमआर शाह ने शनिवार को कहा, जेल में आरोपी के द्वारा लिखी गई कविताएं यह बताती हैं कि उसे कम उम्र में की गई अपनी गलती का अहसास हो गया है। अब उसने सुधार किया है। अपराधी ध्यानेश्वर सुरेश बोरकर को बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया था।

पीठ ने कहा, यह केस दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में आता है। अपराध के समय बोरकर की उम्र 22 साल थी। वह 18 साल जेल में बिता चुका है। वहां उसका व्यवहार भी अच्छा था। वो कोई प्रोफेशनल किलर नहीं है। आरोपी ने फिर से समाज से जुड़ने की कोशिश की। खुद को बेहतर नागरिक के तौर पर स्थापित करने का प्रयास किया। जेल में ही बीए की पढ़ाई पूरी की। उसने आगे बढ़ने का प्रयास किया।
मौत की सजा जरूरी नहीं
फैसले में कहा गया,जानकारी के आधार पर आरोपी के फिर से कोई अपराध करने की कोई आशंका नहीं है। वह अब समाज के लिए कोई खतरा नहीं होगा। साक्ष्य और इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मौत की सजा जरूरी नहीं है। आरोपी की ओर से सीनियर एडव्होकेट आनंद ग्रोवर ने कोर्ट के सामने दलीलें पेश कीं।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपी गांधी रिसर्च फाउंडेशन के अंतर्गत प्रशिक्षण ले रहा है। बोरकर ने एपेक्स कोर्ट में दायर की गई याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट के मौत की सजा के फैसले पर पुनः सुनवाई करने की अपील की थी।

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