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कोयला खदान हादसा: 9 के शव निकाले, 23 अब भी फंसे

गोड्डा जिले में कोयले की एक खदान धंस गई है।

कोयला खदान हादसा: 9 के शव निकाले, 23 अब भी फंसे
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गोड्डा. झारखंड में एक कोयला खदान के धंसने से करीब 40 से ज्यादा मजदूर दब गए हैं। गुरुवार रात आठ बजे खदान धंसने से 40 मजदूर 300 फीट गहरी खाई में दब गए। हादसे में काम पर लगाये गए करीब 35 डंपर, चार पे-लोडर भी धंसने की खबर है। इस घटना में 9 मजदूरों के शव निकाल लिए गए हैं वहीं करीब 23 को अभी भी फंसे हुए बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।
झारखंड के गोड्डा जिले में बीती शाम खदान धंसने से वहां काम कर रहे क़रीब 40 मज़दूर 300 मीटर गहराई में फंस गए हैं। फिलहाल अभी तक सिर्फ 9 लोगों के ही शव निकाले जा सके हैं। वहीं 35 मजदूर अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। सीआइएसएफ और सीआरपीएफ की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। आशंका जतायी जा रही है कि खाई में दबे अधिकतर लोगों की मौत हो गयी है। हालांकि अभी तक मृतकों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। घटना की सूचना फैलते ही अासपास के इलाकों में हाहाकार मच गया था, बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुटे हुए हैं।

मशीनों के साथ दबे मजदूर-

गौरतलब है कि मजदूरों के साथ-साथ 35 डंपर और कई दूसरी खुदाई मशीनों के भी जमीन में धंसने की खबर है। यह खदान ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (ईसीएल) के तहत आता है। फिलहाल 2 लोगों को ही निकाला गया है। घायलों को ऊर्जानगर अस्पताल ले जाया गया है। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने घटना पर दुख जताया है।

पहुंचेगी एनडीआरएफ की टीम-
इसीएल के सभी पदाधिकारी व एसडीपीओ आर मिश्रा के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल खदान के पास पहुंचा है। सभी को सही सलामत निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि बिजली नहीं रहने के कारण राहत कार्य में बाधा आ रही है। बताया जाता है कि बिजली के सारे खंभे गिर गए हैं। बिजली कटने के कारण घटनास्थल के आसपास चारों ओर अंधेरा पसरा हुआ है।
आसपास गांव के हैं सभी मजदूर-
खनन कार्य में ललमटिया के आसपास के भादो टोला, भोराईं, नीमा व ललभुटवा आदि गांव के मजदूर व कर्मचारी लगे थे। इस खदान को इसीएल ने महालक्ष्मी खनन कंपनी को लीज पर दे रखा था। एक ओवर मैन हेमनारायण यादव को जख्मी हालत में वहां से निकाला गया था। जिसका अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
कोहरे व ठंड से रेस्क्यू में परेशानी-
ललमटिया थाना प्रभारी गोपाल सिंह ने बताया कि बड़ी संख्यालोगों के दबे होने की सूचना मिल रही है। ठंड और कोहरे के कारण काम में दिक्कत आ रही है। बताया जाता है दो दर्जन से अधिक कर्मी चालक-खलासी वाहन के साथ दफन हैं।
10 साल पुरानी है भोड़ाय साइट-
इसीएल राजमहल परियोजना की ललमटिया की भोड़ाय साइट में पिछले 10 सालों खुदाई का काम चल रहा था। इस कारण इसे डीप माइनिंग के नाम से जाना जाता है। खदान में पहले ही काफी खनन कार्य हो चुका था। चारों ओर से खदान धंसने लगी थी। बता दें कि दो दिन पहले इसीएल के सीएमडी आरआर मिश्रा राजमहल परियोजना को निरीक्षण करने आये थे। उन्होंने भोड़ाय साइट का निरीक्षण किया था और भोड़ाय गांव को हटाने का निर्देश दिया था।
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