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AIADMK का ऐतिहासिक फैसला, जयललिता होंगी पार्टी की इकलौती महासचिव

अन्नाद्रमुक महापरिषद की बैठक में लिया गया फैसला।

AIADMK का ऐतिहासिक फैसला, जयललिता होंगी पार्टी की इकलौती महासचिव
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अन्नाद्रमुक की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई ने आज जेल में बंद पार्टी की अंतरिम महासचिव वी. के. शशिकला को बाहर का रास्ता दिखाते हुए उन्हें सभी पदों से हटा दिया।

इकाई ने उनके द्वारा की गयी सभी नियुक्तियों को भी अवैध घोषित कर दिया। सिर्फ इतना ही नहीं पार्टी की महापरिषद ने अपनी बैठक में प्रस्ताव पारित कर महासचिव पद को भी समाप्त कर दिया।

इस बहुप्रतीक्षित बैठक में शशिकला द्वारा 15 फरवरी से पहले की गयी सभी नियुक्तियों और बर्खास्तगी को भी अवैध घोषित कर दिया। शशिकला ने भ्रष्टाचार के एक मामले में 15 फरवरी को बेंगलुरू की अदालत में आत्मसमर्पण किया था।

महापरिषद की ओर से शशिकला द्वारा की गयी सभी नियुक्तियों को अवैध घोषित किये जाने के बाद उनके रिश्तेदार दिनाकरण की नियुक्ति स्वत: ही अवैध हो गयी।

पार्टी सुप्रीमो और तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद हुई पार्टी की बैठक में 29 दिसंबर को शशिकला को पार्टी का अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया था।

जयललिता स्थायी महासचिव घोषित

बैठक ने यह भी तय किया कि महासचिव पद समाप्त करने के साथ ही जयललिता को अपना ‘‘स्थायी' महासचिव घोषित किया है। महासभा ने कहा कि जयललिता और पार्टी के संस्थापक एम. जी. रामचन्द्रन की मृत्यु से उत्पन्न शून्य को कोई नहीं भर सकता। ई. मधुसूदन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पलानीस्वामी और पनीरसेल्वम सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने भाग लिया।

फिलहाल जेल में हैं शशिकला

नियुक्ति के एक दिन बाद ही उच्चतम न्यायालय ने आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति रखने के मामले में उन्हें और दो अन्य लोगों को दोषी करार दिया था। फैसले के बाद शशिकला ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था और वह 15 फरवरी से बेंगलुरू के केन्द्रीय कारागार में बंद हैं।

दो नए पदों का सृजन

आज की बैठक में पार्टी का कामकाज चलाने के लिए प्रशासनिक अधिकारों से संपन्न दो नये पदों संयोजक एवं संयुक्त संयोजक का सृजन किया गया। इन दोनों पदों के लिए चुनाव होने तक मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी और उपमुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम क्रमश: संयोजक एवं संयुक्त संयोजक के पद पर रहेंगे।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बैठक

यह बैठक मद्रास उच्च न्यायालय से हरी झंडी मिलने के बाद हुई है। अदालत ने बैठक पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। जयललिता की मृत्यु के बाद हुई परिषद की दूसरी बैठक में आज कहा गया कि अम्मा (जयललिता) की अचानक मृत्यु के सदमे और चिंताओं के बीच पार्टी का कामकाज देखने के लिए वी. के. शशिकला को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया था।

उसने कहा, ‘‘यह बैठक 29 दिसंबर, 2016 को हुई उनकी नियुक्ति को रद्द करने का फैसला आम सहमति से करती है। यह भी तय किया जाता है कि 30 दिसंबर, 2016 से लेकर 15 फरवरी, 2017 के बीच उनके द्वारा की गयी सभी नियुक्तियां वैध नहीं हैं।

फैसले से नाराज़ दिनाकरन

बैठक में लिए गए फैसले पर टीटीवी दिनाकरन ने कहा है कि पार्टी को मद्रास हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश के अनुसार बैठक में लिए गए फैसले इस विषय पर दायर की गई एक अपील के नतीजे पर निर्भर करेंगे और उसके बाद ही पता चलेगा कि शशिकला को पद से हटाया जाना 'सही' है या नहीं।

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